वाद्ययंत्र रावण हत्था ही है आजीविका का साधन
अपनी संस्कृति ही हमारी पहचान है
ऊना/सुखविंदर /25 जून:- ज़िला ऊना के विधानसभा क्षेत्र गगरेट के अंतर्गत आने वाले गांवों में अपनी संस्कृति को संजोए अपनी जिन्दगी का गुजार करते मारो प्यारो राजस्थान जहां संस्कृति, रेत के धोरे, मेवाड़ की धरती पर वीरों का बलिदान, खान-पान के लिए राजस्थानी व्यंजनों के लिए दाल बाटी चूरमा, केर सांगरी आदि कई व्यंजनों, किलों महलों के लिए जाना जाता है वहीं जीवन के रंग संगीत के संग जहां एक ओर जीवन में हर ग़म हर खुशी के मौके पर भी व्यक्ति के खालीपन को दूर करता है। खुशी के मौके पर भी व्यक्ति को भावविभोर कर देता है, ऐसा ही एक वाद्ययंत्र रावण हत्था संगीत की मधुर धुन छोड़ कर हर व्यक्ति का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करता है वहीं यह यंत्र रोजी-रोटी का साधन भी बना हुआ है। ऐसा ही एक कलाकार अपना यंत्र बजाते हुए रविवार को कैलाश नगर नकड़ोह में मिला। संवाददाता ने इस कलाकार के बारे में जानकारी ली तो उसने बताया कि पिछले कई पीढ़ियों से हम यह यंत्र बजा रहे हैं और यही हमारे परिवार की रोजी-रोटी का प्रमुख साधन है। रमेश और श्री राम ने बताया कि हम लोगों को इस बारे में भी जागरूक करते हैं कि हमें अपनी संस्कृति को नहीं भूलना चाहिए। राजस्थान से आए हुए कलाकार अपनी संस्कृति को संजोए हुए रखे हुए हैं परन्तु यहां तक कि आजकल के युवा इस संस्कृति को देखना तो दूर सुनना तक भी पसंद नहीं करते वो अपनी ही धुन में मोबाइलों पर मस्त रहते हैं।उन्होंने कहा कि जो भी लोगों द्वारा हमें दिया जाता है, उसी में हम खुश हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को संदेश दिया कि अपनी नीयत साफ रखें, अच्छा काम करें, ख़ुश रहो और दूसरों को भी हमेशा खुश रखो और अपनी संस्कृति को न भूलें क्योंकि यह हमारे बुजुर्गों की देन है।
