क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड (समान नागरिक संहिता)
समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड) को लेकर एक बार फिर से बहस शुरू हो गई है। समान नागरिक संहिता मतलब सबके लिए एक कानून। भारत के विधि आयोग ने देश के धार्मिक संगठनों से समान नागरिक संहिता को लेकर आगामी 30 दिनों के भीतर सुझाव आमंत्रित किए हैं। विधि आयोग द्वारा इस विषय पर सुझाव आमंत्रित किए जाने के बाद एक बार फिर यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। समान नागरिक संहिता एक देश एक कानून की विचारधारा पर आधारित है। इसके लागू होने के उपरांत देश के सभी धर्मों और समुदायों के लिए एक ही कानून होगा। समान नागरिक संहिता में संपत्ति के अधिकार, विवाह, तलाक, गोद लेना आदि को लेकर सभी के लिए एक समान कानून बनाया जा सकता है। वर्तमान में भारत के संविधान में भारत को एक धर्मनिरपेक्ष राज्य के रूप में परिभाषित किया गया है। इसमें सभी धर्मों, संप्रदायों के मानने वालों को अपने अपने धर्म से संबंधित कानून बनाने का अधिकार है। वर्तमान में देश में दो प्रकार के पर्सनल लॉ है जिसमें एक हिंदू मैरिज एक्ट 1956 जो हिंदू, सिख, ईसाई, बौद्ध,जैन व अन्य धर्मों व संप्रदायों पर लागू होता है जबकि दूसरा मुस्लिम धर्म के मानने वालों के लिए मुस्लिम पर्सनल लॉ नाम से कानून है। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि उपरोक्त विषयों को लेकर गैर मुस्लिमों के लिए अलग कानून है जबकि मुस्लिमों के लिए अलग कानून। लगभग सभी देशों में समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू है। यहां तक कि पाकिस्तान, बांग्लादेश सहित अधिकतर मुस्लिम देशों में भी सभी धर्मों के लिए एक ही कानून है व किसी विशेष समुदाय के लिए अलग से कानून नहीं है। भारत में भी यूनिफॉर्म सिविल कोड की काफी अरसे से मांग की जा रही है लेकिन मुस्लिम पक्ष की तरफ से इस कानून को बनाने का विरोध होता रहा है। लेकिन अब लगता है कि सरकार यूनिफॉर्म सिविल कोड बनाने और लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
-एडवोकेट बिनत शर्मा
