February 22, 2026

वर्शिप एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया बड़ा आदेश

एक्ट को चुनौती देने वाली याचिकाओं के निपटान तक देश में कोई और मुकदमा दर्ज नहीं किया जा सकता

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि जब तक वह चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई और उनका निपटारा नहीं कर देता, तब तक देश में कोई और मुकदमा दर्ज नहीं किया जा सकता है। समीक्षा के तहत प्रमुख प्रावधानों में धारा 2, 3 और 4 शामिल हैं, जो धार्मिक स्थलों के रूपांतरण और 1947 की उनकी स्थिति के बारे में मुकदमों को रोकते हैं। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के वी विश्वनाथन की विशेष बेंच कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है। जब तक हम मामले की सुनवाई और निस्तारण नहीं कर देते, तब तक कोई और मुकदमा दर्ज नहीं किया जा सकता। हमारे पास राम जन्मभूमि मामला भी है। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि सरकार इस मामले में हलफनामा दाखिल करेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक केंद्र का जवाब दाखिल नहीं होता, तब तक मामले की सुनवाई पूरी तरह संभव नहीं है। न्यायालय ने केंद्र द्वारा याचिकाओं पर जवाब दाखिल किए जाने के बाद संबंधित पक्षों को प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगले आदेश तक सर्वेक्षण के लिए कोई नया वाद किसी भी अदालत में दायर या पंजीकृत नहीं किया जाएगा।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और महाराष्ट्र के विधायक जितेंद्र सतीश अव्हाड ने भी उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली कई लंबित याचिकाओं के खिलाफ याचिका दायर करके कहा है कि यह कानून देश की सार्वजनिक व्यवस्था, बंधुत्व, एकता और धर्मनिरपेक्षता की रक्षा करता है।

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