February 23, 2026

जय गौ माता श्री सुरभ्यै नमः जय गोपाल

भारत की गौरवशाली परंपरा में देखे तो हमारे देश का ज्ञान, विज्ञान, धर्म, ब्रह्मज्ञान,तत्व ज्ञान,ऋषि मुनि, अवतार, उत्सव,वीर वीरांगना परंपरा रही हैं! जिसके कारण आज भी भारत,भारत हैं, अनगिनत अत्याचारों के बाद भी हमारा अस्तित्व स्थिर हैं! हमारे यहाँ पर प्रतिदिन कोई न कोई उत्सव हैं और वह उत्सव कोई न कोई प्रेरणा,उत्साह,उमंग,आनंद,प्रेम हमें देता हैं!
अभी अभी दीपावली आयी, अमावस्या के दिन उस दिन गैया मैया का जन्मदिवस हैं! अगले दिन गोवर्धन पूजा और गोवर्धन पूजा से लेकर गोपाष्टमी के अगले दिन तक गौ नवरात्रे!
गौ नवरात्रों में हम ( गौ जन,राष्ट्र जगत हिताय च अहम संकल्पम करिष्ये) का संकल्प लेकर ” श्री सुरभ्यै नमः” इस मंत्र का जाप व लेखन करते हैं! यह सारे दिन गौ माता से जुड़े हैं
“गावो विश्वस्य मातर:” गाय पूरे संसार की माँ हैं! यह जो शब्द माँ शब्द देखने में बहुत छोटा हैं,लेकिन इसका भाव बहुत ही विराट हैं! चौरासी लाख योनियों में केवल गौ माता का बच्चा जन्म। लेते ही माँ….. शब्द का उच्चारण करता हैं सृष्टि में माँ शब्द सबसे प्रथम गौ से ही आया हैं तभी से गौ माँ के समान पूजी जाने लगी!
समुद्र मंथन देवताओं को अमृतत्व प्रदान करने के लिए स्वयं भगवान विष्णु ने कच्छप अवतार लिया, मंदरांचल पर्वत की मंथनी को अपनी पीठ पर रखा,वासुकी सर्प की रस्सी बनाई गई समुद्र का मटका बनाया एवं देवताओं एवं दानवों ने मिलकर समुद्र का मंथन किया , चौदह प्रकार के रत्न निकले लक्ष्मी जी,विष, अमृत, घोड़े आदि। लेकिन एक समय ऐसा आया कि मंथन करते समय समुद्र से कामधेनु स्वरूपा पांच गौ माता प्रकट हुई सुरभि,बहुला,सुभद्रा,नंदा,सुशीला, देवताओं के हिस्से में आई, लेकिन मानव मात्र के कल्याण के लिए , सृष्टि के कल्याण के लिए देवताओं ने पूजा अर्चना की आरती उतारी और उस समय धरती पर पांच महर्षि हुए ( ऋषि जमदग्नि, भारद्वाज, गौतम, वशिष्ठ और असित) यह परम वैज्ञानिक थे।
इन पाँचो परम वैज्ञानिकों के आश्रम में इन गायों को भेज दिया गया। इन पाँचो महा ऋषियों ने इनके ऊपर एवं पंचगव्य के ऊपर शोध कार्य किया, गायों का संवर्द्धन किया यही से गायों की वृद्धि प्रारंभ हुई। भगवान राम के प्राकट्य का कारण भी गौ माता ही हैं ,रघुकुल में एक परम प्रतापी राजा हुए राजा दिलीप एक घटना आती हैं स्वर्ग से वापिस आते हुए रास्ते में राजा दिलीप को एक गौ माता मिली,राजा दिलीप ने उसको प्रणाम करना तो दूर उसकी ओर देखा भी नहीं, राजा दिलीप श्रापित हो गए,बहुत दुखी रहने लगे पत्नी के कहने पर वह गुरु वशिष्ठ जी के पास गए । सारा कारण ध्यान में आया, तब गुरु वशिष्ठ ने कहां इस श्राप से मुक्ति केवल गौ सेवा से होगी। राजा दिलीप एवं उनकी पत्नी ने ऋषि आश्रम में रहकर ही गौ सेवा की राजा दिलीप की परीक्षा भी नंदिनी गौ माता में ली,जो कामधेनु गौ माता की बेटी हैं, परीक्षा में राजा दिलीप उत्तीर्ण हुए, उन्हीं राजा दिलीप के घर रघु आए,रघु के अज, अज के दशरथ और दशरथ के घर राम आए, अगर नंदिनी की सेवा ना होती तो राम कहाँ आते स्वयं भगवान राम ने कहां “विप्र धेनु,सुर, संत हित, मनुज लीन अवतार। निज इच्छा निर्मित तनु माया गुण गौ पार। भगवान राम के प्रकट होने पर राजा दशरथ ने हज़ारों गायों के सींगों पर सोने मढ़ाकर ब्राह्मणों को दान में दी। स्वयं भगवान राम वनवास को गए तो हजारों गायों को त्रिजट नामक ब्राह्मण को दान की।
भगवान श्री कृष्ण सारी लीलाएं ही गौ माता के साथ ही हैं ,प्रकट होते ही पहले दिन श्री कृष्ण गोकुल गए मैया यशोदा एवं नंद बाबा के पास और सबसे पहले गौशाला ही ले जय गया । पांचवें दिन तो श्री कृष्ण को मारने के लिए पूतना रूप बदल कर आई । उसके स्तनपान किया जिसमें विषैला विष लगा हुआ था, उसको भी श्री कृष्ण ने मुक्त किया, पूतना के वक्षस्थल पर श्री कृष्ण लीला कर रहे हैं । पूतना के ऊपर से श्री कृष्ण को उतारा गया ओर मैया यशोदा ने अपने लाल को हृदय से लगाया और कृष्ण को उठा लगी दौड़ने ओर सीधे गौशाला ले गई कृष्ण की 10 इन्द्रियां और दो अंग ग्रीवा एवं नाभि इन बारह अंगों को गौमूत्र से नहलाया गया और फिर बाद इन्हीं बारह अंगों पर गोबर का लेपन किया गया।
श्री कृष्ण जब साढ़े पाँच वर्षों के हुए तो बछड़ों से काफी प्रेम करते थे इसलिए उनका एक नाम वत्सपाल (बछड़ों को पालने वाला) हुआ ।
जब छ: वर्ष की आयु थी तब भगवान ने विनय किया कि मैया मुझे गैया चरावे को जानो हैं । मैया ने पूरा प्रशिक्षण देकर कृष्ण को गौचारण के लिए तैयार किया और नंदबाबा से बात कर मुहूर्त निकलवा कर भगवान को गौ चारण के लिए तैयारियां शुरू की दिन निकला अष्टमी,उस दिन भगवान को खूब सजाया गया , गईया मैया को भी दुशाले उड़ाए गए,पकवान बने,सारे ब्रज,गोकुल को सजाया गया, मिठाईयां बंटी की आज हमारा कृष्ण गौचारण के लिए जाएगा आज के दिन कृष्ण ने नंगे पैर छ: वर्ष की आयु में नौ लाख गायों को जंगल में चराना प्रारंभ किया। उसी दिन का नाम गोपाष्टमी पड़ा। हम सभी के यह पर्व गोपाष्टमी महापर्व के रूप में मनाते हैं। आज हम सभी गौ प्रेमी,गौ भक्त,गौ सेवक,गौ पालक,गौ रक्षक,गौ वृत्ति, सभी सनातनियों के लिए परम सौभाग्य हैं कि जो कृष्ण गौ चारण,गौ सेवा करके गोपाल कहलाए। हम सब भी खूब गौ सेवा करें। अलग अलग प्रकार से और गोपाल बन जाए। गौ गोपाल की जय। कल गौ नवरात्रों का नौवां दिन हैं विश्राम का दिन हैं । हम सब भी पूर्णाहुति डाले और आगे भी और आगे भी कम से कम तीन माला “श्री सुरभ्यै नमः” अपने जीवन का अंग बनाए। अपने राष्ट्र में इस सब अनुष्ठान से एक आध्यात्मिक वातावरण तो बनेगा ही। मेरी गौ माता भी आनंदित होगी। अपने सभी आयामों के कार्य बढ़े, ऐसा हम सब अपने अपने भाव से संकल्प करें। हर वर्ग के व्यक्ति को कार्य मिले,अपने कार्य से जोड़े,अपना स्थान जहाँ हमारा निवास हैं केंद्र हो,उसको एक शक्ति केंद्र के रूप में खड़ा करें।
आरम्भ तो अपने से ही करना हैं
अपना जन्मदिन,शादी की वर्षगांठ,खुशी का दिन गौ माता के साथ मनाएं, पहली रोटी गौ माता की, एक मुट्ठी अनाज और 1 रुपया रोज गौ माता के लिए निकाले। आज के दिन विशेष रूप से चोकर और शक्कर का दान गौ माता के लिए करें।
जीवन में एक गौ दान विधि अनुसार और जीवन भर गौ माता के लिए दान
गौ माता सर्वदेवमयी हैं। तैंतीस कोटि देवी देवताओं का वास गौ माता में हैं। सारे देवी देवता,ग्रह,नक्षत्र गौ माता में विराजमान हैं। गौ माता का रोम रोम तीर्थ है। गौ माता के खुरों में नाग देवता, चरणों में धर्म,अर्थ,काम,मोक्ष, चारों थनों में समुद्र,गोबर में लक्ष्मी, गौमूत्र में गंगा, पूंछ में हनुमान जी विराजमान हैं। गाय के पेट में अग्नि, नारायण,पीठ में सूर्यकेतु नाड़ी में सभी ग्रह वास करते हैं। सींगों में ब्रह्म,विष्णु,महेश,मस्तक पर गौरी विराजमान हैं। आंखों में सूर्य और चंद्रमा,दांतों में सारे वसु ,जीभ में वरुण देवता और गाय की हुंकार में माँ शारदा का वास हैं। गौ माता सृष्टि की संरक्षक हैं। पंचभूतो की माँ हैं। गौ माता चलता फिरता डॉक्टर हैं। गौ माता पंचगव्य दायिनी हैं। पंचगव्य से मनुष्य चिकित्सा का जान हमारे ऋषि मुनियों प्राचीन काल से दिया हैं। 80% आयुर्वेद में जड़ी बूटियों का शोधन गौ मूत्र में होता हैं। कुछ गौ माता के दूध में दही में , घी में ,गोबर में होता हैं।
गौ माता हमारी अर्थ व्यवस्था का आहार का आधार हैं,आज सबसे बड़ी समस्या शुद्ध आहार की हैं। गौ माता के गोबर,गौमूत्र से भूमि का सुपोषण होना चाहिए ,भूमि शुद्ध होगी तथा हमारे आहार शुद्ध प्राप्त होगा हम सभी गौ प्रेमी, गौ भक्त,गौ पालक,अपने से शुरू करें। कम से कम हम अपनी छत पर गौ आधारित बागवानी ( टैरिस गार्डन) की शुरुआत करें,लोगो से करवाए। पंचगव्य के उत्पाद अपने घरों में उपयोग में लाए। अमावस्या पूर्णमासी के दिन अपने गांवों में,शहरों में, गौशालाओं में गौ पूजन,आरती,भजन और कोई आयाम के ऊपर एकत्रीकरण करें। हमारा संकल्प गांवों में प्रत्येक किसान के घर देशी गौ माता और शहरों में प्रत्येक घर में देशी गौ माता के दूध का सेवन करें।
गौ माता की जय

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *