प्रेमानंद महाराज ने क्यों कहा, “हमारे पास समय कम है”
वृंदावन के प्रख्यात संत प्रेमानंद महाराज ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण घोषणा की है कि वे अब यूट्यूब पर अपने भक्तों को दर्शन नहीं देंगे। उनका यह निर्णय भक्तों की सुरक्षा और उनके कल्याण को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। यह निर्णय एक भावुक संदर्भ में लिया गया, जिससे उनकी चिंता और प्रेम की गहराई का पता चलता है। महाराज ने एक वीडियो संदेश में बताया कि पिछले कुछ समय से जब भी वह अपने सत्संग का आयोजन करते हैं, तो वहां भक्तों की भीड़ इतनी बढ़ जाती है कि लोग एक-दूसरे के साथ धक्का-मुक्की करने लगते हैं।
यह स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। उन्होंने कहा, “इससे हमारा मन दु:खी है। हम कभी भी नहीं चाहेंगे कि हमारे भक्तों को कोई चोट पहुंचे या उन्हें किसी प्रकार की कठिनाई का सामना करना पड़े।” जब एक भक्त ने उनसे पूछा कि आखिरकार वे यूट्यूब पर क्यों नहीं आ रहे हैं, तो उन्होंने उत्तर में कहा, “हम चाहते हैं कि जो भी हमारे पास भक्त आए, उसका मंगल होना चाहिए। हमारा ध्यान हमेशा उनके भले पर होना चाहिए।” यह स्पष्ट करता है कि उनका उद्देश्य केवल भक्तों का भला करना है, न कि भीड़ की वजह से किसी प्रकार की परेशानी को बढ़ाना।
महाराज ने अपनी स्वास्थ्य स्थिति का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने बताया कि उनकी दोनों किडनी फेल हो चुकी हैं। इस संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा, “हमारे पास अब ज्यादा समय नहीं है। हम नहीं चाहते कि कोई भी भक्त हमारे सत्संग में आए और किसी प्रकार की असुविधा का सामना करे।” उनका यह बयान उनके स्वास्थ्य के प्रति गंभीरता को दर्शाता है, और उनके भक्तों के प्रति उनके अपार प्रेम और चिंता को भी उजागर करता है।
प्रेमानंद महाराज की यह घोषणा उनके भक्तों के लिए एक बड़ा सदमा है। कई भक्त इस निर्णय से चिंतित हैं, क्योंकि वे महाराज के सत्संग से आध्यात्मिक ऊर्जा और प्रेरणा प्राप्त करते थे। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वे अभी भी व्यक्तिगत रूप से अपने भक्तों से मिलना चाहेंगे और उन पर ध्यान देंगे, लेकिन यूट्यूब पर लाइव सत्संग नहीं करेंगे। महाराज की शिक्षाएं हमेशा से प्रेरणादायक रही हैं। वे जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा देते हैं और लोगों को कठिनाइयों का सामना करने के लिए प्रेरित करते हैं। उनका यह निर्णय दर्शाता है कि वे अपने भक्तों के प्रति कितने समर्पित हैं और उनके कल्याण के लिए कितनी चिंतित हैं।
प्रेमानंद महाराज का यह कदम भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश लेकर आया है: जीवन में सुरक्षा और स्वास्थ्य सबसे पहले आते हैं। इसके साथ ही, यह भी दर्शाता है कि एक सच्चे गुरु का मुख्य उद्देश्य अपने शिष्यों का भला करना है। आखिरकार, प्रेमानंद महाराज ने यह बात स्पष्ट कर दी है कि उनका जीवन और शिक्षाएं हमेशा से भक्तों के मार्गदर्शन के लिए रहे हैं, और वे हमेशा उनके कल्याण की कामना करते रहेंगे। उनके इस निर्णय ने भक्तों को एक नई सोचने की दिशा दी है और उन्हें अपने जीवन में सावधानी बरतने के लिए प्रेरित किया है।
