February 24, 2026

हिन्दू धर्म में आस्था रखने वालों की सबसे अधिक संख्या भारत में

ईसाई व मुस्लिम धर्म में आस्था रखने वालों के बाद विश्व में तीसरे स्थान पर हिन्दू धर्म में आस्था रखने वाले आते हैं हिन्दू धर्म में आस्था रखने वालों की सबसे अधिक संख्या भारत में है लेकिन भारत सहित विश्व में अन्य देशों में रहने वाले हिन्दुओं पर खतरा बढ़ता जा रहा है हिन्दुओं के पर्व और मंदिर, हिन्दू विरोधियों के निशाने पर हैं। 17 सितंबर को न्यूयार्क के मेलविले के बीएपीएस श्री स्वामी नारायण मंदिर को अपवित्र किया गया था। अब अमेरिका में कैलिफोर्निया के सैक्रामेंटों में अज्ञात बदमाशों ने नफरत फैलाने के मकसद से बीएपीएस मंदिर में तोड़फोड़ की और उसकी दीवारों पर ‘हिन्दुओं वापस जाओ’ के नारे लिख दिए। बीएपीएस मंदिर प्रशासन के जनसंपर्क विभाग ने यह जानकारी दी है।

बीएपीएस जनसंपर्क विभाग ने ‘एक्स’ पर लिखा,‘न्यूयार्क में बीएपीएस मंदिर में अपवित्रीकरण की घटना के 10 दिन से भी कम समय में सैक्रामेंटों में हमारे मंदिर में रात को यह घटना हुई और ‘हिन्दुओं वापस जाओ’ के हिन्दू विरोधी नारे लिखे गए। हम शांति की प्रार्थना के साथ नफरत के खिलाफ एकजुट हैं। इस घटना से हमारा दुख और गहरा हो गया है और दिल में नफरत रखने वालों सहित सभी के लिए हमारी प्रार्थनाएं और मजबूत हो गई हैं। बयान में कहा गया, बीएपीएस इन घृणा अपराध पर कानून प्रवर्तन अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहा है।

बयान में कहा गया है सैक्रामेंटो में बीएपीएस श्री स्वामी नारायण मंदिर जीवंत हिन्दू समुदाय का स्थान है जो बड़े समुदाय के वास्ते कई गतिविधियों और परियोजनाओं में लगा हुआ है। हम इस सामुदायिक ताने-बाने का अभिन्न अंग हैं और रहेंगे। इस घटना के बाद मंदिर से संबद्ध लोग प्रार्थना के लिए एकत्रित हुए तथा उन्होंने परम पावन महंत स्वामी महाराज के सद्भाव और सम्मान के आदर्श को याद करते हुए शांति एवं एकता का आह्वान किया। देश में हिन्दू समुदाय के खिलाफ घृणा अपराध और मंदिर में तोडफ़ोड़ की निरंतर बढ़ती प्रवृत्ति के बीच अमेरिका में एक महीने से भी कम समय में बीएपीएस मंदिर में अपवित्रीकरण की यह दूसरी घटना है। कैलिफोर्निया से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के सदस्य एवं अमेरिका चिकित्सक अमरीश बाबूलाल ने ‘एक्स’ पर इस बाबत लिखा। बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथियों ने समूह मंदिरों और पूजा समितियों को धमकी भरे पत्र भेजकर 5 लाख बांग्लादेशी टका की मांग की है। अगर मांगी गई राशि नहीं दी जाएगी तो दुर्गा पूजा करने से हिन्दू समुदाय को रोका जाएगा।

मुस्लिम देशों में तो पहले से ही हिन्दुओं पर हमेशा खतरे की तलवार लटकती रहती है अब यूरोप और पश्चिमी देशों सहित अन्य जगहों पर भी हिन्दुओं तथा उनके मंदिरों को निशाना बनाया जाने के आए दिन समाचार मिलते रहते हैं। ऐसा क्या कारण है कि देश-विदेश में केवल हिन्दुओं की भावनाओं से खिलवाड़ होता है। इस का मूल कारण है कि हिन्दू शस्त्र और शास्त्र मे संतुलन बनाकर जीवन जीना भूल गए हैं जबकि हिन्दुओं के देवी, देवता हमेशा शस्त्र धरण किए हुए दिखाई देते हैं। आज तीर-कमान या तलवार व गोली चलाने का समय नहीं है, आज संगठनात्मक दृष्टि से अपने को मजबूत करने की आवश्यकता है। विभाजित समाज की कोई नहीं सुनता। मंदिरों के प्रति हमारी बढ़ती उदासीनता के कारण भी मदिरों के अपवित्रीकरण के मामले बढ़ते जा रहे हैं। बड़े मंदिरों पर सरकारों का नियंत्रण है। गत दिनों पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी की जयंती के उपलक्ष्य में रखे कार्यक्रम में धर्म जागरण मंच पंजाब के संयोजक रामगोपाल ने हिन्दू समाज को संबोधित करते हुए कहा कि मतांतरण केवल बातों से नहीं रुकेगा।

मंदिरों की गतिविधियां निरंतर सक्रिय रखकर मतांतरण रोका जा सकता है। आज हर गली- मोहल्लों के मंदिरों में प्रतिदिन होने वाली आरती में प्रत्येक हिन्दू कम से कम 10 से 20 मिनट का समय दे, सप्ताह में कम से कम एक दिन मंदिरों में जाकर धर्म पर चर्चा करें, सनातन परिवार की हर महिला निश्चित करके घर के निकट के मंदिर में नियमित रूप से जाए। यदि हिन्दू समाज के लोग ऐसा कर पाते हैं तो कोई शक्ति नहीं है जो सनातन परंपरा को मानने वाले किसी भी व्यक्ति का मतांतरण कर सके। उन्होंने कहा कि पंडित जी की जन्मतिथि पर सभी मोहल्लों के मंदिरों में इनके चित्र पर पुष्प अर्पित किए जाएं तथा प्रत्येक मंगलवार को सभी लोग परिवार सहित मंदिर में सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ करने का संकल्प लें। धर्म जागरण के राम गोपाल द्वारा जो सुझाव दिया गया है उसको हिन्दू समाज को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है।

देश विदेश में हिन्दुओं पर बढ़ रहे खतरे का मूल कारण हिन्दू समाज का विभाजित होना और मंदिरों के प्रति उदासीन तथा संगठनात्मक रूप से कमजोर होना ही है। जब तक हिन्दू एक मंच पर आकर अपनी आवाज विश्व के सामने बुलंद नहीं करता तब तक हिन्दुओं पर खतरा बढ़ता ही रहेगा। समाज और सरकार दोनों को बढ़ते खतरे को ले आत्मचिंतन करने की आवश्यकता है।

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