March 14, 2026

15 दिन चले इस प्रशिक्षण वर्ग में पंजाब के सभी जिलों के 150 स्थानों से 260 शिक्षार्थियों ने लिया भाग

तलवाड़ा , राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पंजाब का ‘संघ शिक्षा वर्ग’ डीएवी स्कूल के प्रांगण में सम्पन्न हो गया जिसकी अध्यक्षता विश्व धर्म शान्ति सेवा मिशन के चेयरमैन सन्त बाबा लक्खा सिंह जी (नानकसर) ने की तथा इस समारोह मे अति विशिष्ट सेवा मेडल तथा परम् विशिष्ट सेवा मेडल से अलंकृत, सेवा निवृत्त, लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह एवं पूज्य महन्त राजगिरी जी महाराज क्रमशः मुख्य अतिथि तथा विशिष्ट अतिथि रहे। संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल कार्यक्रम के मुख्य वक्ता रहे। सनातन धर्म सर्वहितकारी विद्या मन्दिर में पिछले 15 दिनों से चल रहे इस वर्ग में 150 स्थानों से 15 से 40 वर्ष आयु वर्ग के 260 विद्यार्थी तथा व्यवसायी शिक्षार्थियों ने भाग लिया और संघ की रीति-नीति का प्रशिक्षण लिया।

आज वर्ग के समापन समारोह को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह डॉ० कृष्ण गोपाल ने कहा कि किसी भी देश समाज की उन्नति का कारण वहां का सामान्य नागरिक होता है। जिस देश का सामान्य नागरिक अपने अधिकारों के साथ साथ अपने कर्तव्यों के प्रति भी सजग तथा प्रतिबद्ध रहता है वही देश आगे बढ़ता है।

उन्होंने अपने भाषण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय बैठक में निश्चित हुये ‘पंच परिवर्तनों’ का स्मरण कराया। उन्होंने पंच परिवर्तन के नाते ‘समरसता’, ‘कुटुम्ब प्रबोधन’, ‘पर्यावरण’, ‘स्व का बोध’ तथा ‘नागरिक कर्तव्य’ का उल्लेख किया।

इसका विस्तार करते हुए उन्होंने कहा कि ‘पंच परिवर्तन’ में पहला बड़ा परिवर्तन है- समरसता। उन्होंने कहा कि स्वतन्त्रता के इतने वर्ष बीत जाने के पश्चात भी जातीय भेदभाव देखने को मिलता है, इस कारण अपने हिन्दु समाज की बहुत क्षति हुई है। पंजाब जैसे सीमावर्ती प्रान्त में बड़ी संख्या में हुए मतान्तरण के अनेक कारणों में जातीय भेदभाव भी एक कारण है, अपने देश का विचार यह मानता है कि भेद तो ऊपर ऊपर दिखने वाले हैं, गहराई में सब एक हैं। ऊपर दिखती भिन्नता में अंतर्निहित एकत्व को ढूंढना ही अपने देश का दृष्टिकोण है। जीवन में समरसता का व्यवहार अपना कर हम अपने समाज को सुदृढ़ करें।

‘पंच प्रण’ में दूसरा संकल्प ‘कुटुम्ब प्रबोधन’ है। पश्चिम के अन्धानुकरण तथा आधुनिकता की दौड़ में हमारी परिवार संस्था कमजोर हो चली है। माता-पिता के पास बच्चों के लिए तथा आगे चलकर बच्चों के पास वृद्ध माता-पिता के लिए समय ही नहीं है। संयुक्त परिवार तो जैसे बीते कल की बात हो गई है। जिसके कारण अनेक परिवारों में पैसा, गाड़ी, मकान, नौकर आदि सब कुछ होते हुए भी अशान्ति तथा दुख है, समाज में कठिनाई आने पर हर कोई स्वयं को अकेला पता है। इससे बचने के लिए बच्चों को संस्कार देकर परिवार संस्था को सुदृढ़ करना अति आवश्यक है।

तीसरे परिवर्तन का उल्लेख करते हुये उन्होंने कहा कि हमें अपने पर्यावरण को शुद्ध रखना होगा अन्यथा हम एक वैश्विक संकट की ओर बढ़ते जा रहे हैं। प्रतिवर्ष वृक्ष कटते जा रहे हैं, ग्लेशियर पिघल रहे हैं, पृथ्वी गर्म होती जा रही है। समय रहते इसका विचार कर समाधान ढूंढना होगा ताकि आने वाली पीढ़ियों को हम सुरक्षित रख सकें, पूरा विश्व इस विषय में भारत से आशा लगाए बैठा है क्योंकि भारत का विचार समस्त चराचर सृष्टि के कल्याण की कामना करता है।

चौथे परिवर्तन ‘स्व का बोध’ का उल्लेख करते हुये उन्होंने कहा कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में हम चिन्तन करें कि हमारा अपना क्या है, हमारे चिन्तन,भाषा, वेष, नीति तथा परम्परा में ‘स्व’ प्रकट होना चाहिए।’परिवार व्यवस्था’ विश्व को हमारी देन है। हमें त्यागपूर्वक जीवन व्यतीत करना चाहिए, यह हमारा अपना विचार है, परन्तु आज क्रेडिट कार्ड के माध्यम से अपने आगामी समय के वेतन को खर्च कर विदेश भ्रमण करना बहुत से बन्धुओं की जीवन शैली में आ गया है। इसे बदलना होगा।

नागरिक कर्तव्य पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि नागरिकों का कर्तव्य बोध देश और समाज की प्रगति का रास्ता तैयार करता है। यह मूलभूत प्राणशक्ति है।बिजली की बचत, खेतों में मिलने वाले पानी का पूरा इस्तेमाल, केमिकल मुक्त खेती, हर कीमत पर भ्रष्टाचार से दूरी आदि हर क्षेत्र में नागरिकों की जिम्मेदारी और भूमिका बनती है। किसी देश का प्रत्येक नागरिक अगर अपना कर्तव्य निष्ठा पूर्वक निभाने लगे तो देश हमेशा मजबूती से खड़ा रहता है और हर क्षेत्र में आगे बढ़ता रहता है।

उन्होंने इस बात को स्पष्ट किया कि पूरे विश्व का भारत की ओर देखने का दृष्टिकोण बदल चुका है। समस्याओं का समाधान समूचा विश्व भारत की धरती पर खोजने लगा है।

इस अवसर पर बोलते हुये वर्ग के सर्वाधिकारी डॉ० रजनीश अरोड़ा ने बताया कि वर्ग में शिक्षार्थियों को संघ की शाखा लगाने, समता, व्यायाम, खेल, बौद्धिक विकास, सेवाकार्य, सम्पर्क, घोष आदि अनेक गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया गया। संघ के सेवा, सम्पर्क तथा प्रचार विभाग की ओर से शिक्षार्थियों को व्यवहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।

वर्ग में मातृहस्त भोजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें इस क्षेत्र के 154 परिवार घर से भोजन पका कर लाये तथा वर्ग स्थान पर आ कर शिक्षार्थियों को साथ बैठ कर उन्हें भोजन कराया तथा स्वयं भी किया। विशेष बात यह रही कि भोजन का वितरण घरों से आई माताओं-बहनों ने किया।

समापन समारोह के दौरान स्वयंसेवकों ने विभिन्न कलाओं का प्रदर्शन भी किया। इस अवसर पर संघ शिक्षा वर्ग के संचालन में सहयोगी रहे सर्वहितकारी शिक्षा समिति, डी ए वी स्कूल प्रबन्धन समिति, भाखड़ा ब्यास प्रबन्धन बोर्ड, तलवाड़ा के नागरिकों तथा पंजाब पुलिस आदि समाज की विभिन्न संस्थाओं व संगठनों का वर्ग के सर्वाधिकारी डॉ० रजनीश अरोड़ा ने हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित किया। वर्ग को सफलतापूर्वक संचालित करने में 42 व्यवस्थापकों ने दिन रात अपनी सेवाएं दीं।

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