पराली न जलाने वाले किसानों को प्रोत्साहित करने के साथ ही अन्य को भी किया जा रहा है जागरूक
सचिन सोनी, आनंदपुर साहिब, धान की पराली न जलाने के अभियान के तहत लगातार कार्यक्रम जारी हैं। कृषि विभाग ने मजारा गांव के किसानों से धान के अवशेषों के प्रबंधन के लिए किसानों द्वारा उपयोग की जाने वाली विभिन्न विधियों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पराली न जलाने वाले किसानों को प्रोत्साहित करने तथा अन्य किसानों को प्रेरित करने का उद्देश्य यह है कि अन्य किसान भी पराली न जलाने का दृढ़ निर्णय ले सकें। विशेषज्ञों ने किसानों से अपील की कि वे धान की पराली को खेत में मिलाएं और बढ़ते प्रदूषण को कम करने में योगदान दें। पराली न जलाने वाले किसानों का कहना है कि पराली को मिट्टी में मिलाने से मिट्टी में पोषक तत्व बढ़ गए हैं, जिससे खाद कम डाली गई है। कृषि खर्च भी कम हुआ है। इस मौके पर बलजिंदर कौर सरपंच, मंजीत कौर, रीना रानी, अवतार सिंह, जसपाल सिंह, दिलबाग सिंह, हरनेक सिंह और अन्य ग्रामीण मौजूद थे।
