1 लाख कमाने वाली पत्नी ने मांगा मेंटिनेंस तो भड़का कोर्ट, कहा- यह तो मांस नोचने जैसा
भोपाल, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि आर्थिक रूप से सक्षम पत्नी द्वारा मेंटिनेंस (भरण-पोषण) की मांग उचित नहीं ठहराई जा सकती। अदालत ने इस मामले में कड़ी टिप्पणी करते हुए याचिका को खारिज कर दिया और फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा।
न्यायमूर्ति जस्टिस विवेक जैन ने सुनवाई के दौरान अंग्रेजी साहित्यकार विलियम शेक्सपियर के प्रसिद्ध नाटक द मर्चेंट ऑफ़ वेनिस का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मांग वैसी ही प्रतीत होती है, जैसे किसी के शरीर से मांस का टुकड़ा मांगना। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी मांग को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
अदालत ने पाया कि महिला की मासिक आय 1 लाख से अधिक है, जिससे वह अपना जीवन-यापन आराम से कर सकती है। साथ ही, दंपति का कोई बच्चा भी नहीं है, जिसके पालन-पोषण का अतिरिक्त दायित्व हो। कोर्ट ने कहा कि मेंटिनेंस का प्रावधान उन परिस्थितियों में लागू होता है, जब पत्नी आर्थिक रूप से निर्भर हो या बच्चों की जिम्मेदारी हो। इस मामले में ऐसा कोई आधार नहीं बनता।
इससे पहले 18 फरवरी 2026 को फैमिली कोर्ट ने आदेश दिया था कि तलाक की प्रक्रिया पूरी होने तक महिला को कोई मेंटिनेंस नहीं दिया जाएगा। हाई कोर्ट ने इस फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि इसमें हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। दंपति का विवाह 4 नवंबर 2022 को हुआ था और 2023 से दोनों अलग रह रहे हैं। पति ने तलाक की याचिका दायर की थी, जबकि पत्नी ने अदालत से मेंटिनेंस की मांग की थी।
याचिका में महिला ने स्वीकार किया था कि वह नौकरी करती हैं और पहले उनकी वार्षिक आय करीब 20 लाख थी, जबकि उनके पति की आय 30 लाख से अधिक बताई गई। बाद में महिला ने अदालत में कहा कि उनकी आय घटकर लगभग 14 लाख सालाना रह गई है। हालांकि, हाई कोर्ट ने कहा कि यदि इस आंकड़े को भी स्वीकार किया जाए, तब भी महिला की मासिक आय लगभग 1.25 लाख बनती है, जो उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाती है।
अदालत ने अपने फैसले में दोहराया कि मेंटिनेंस का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर या आश्रित जीवनसाथी की सहायता करना है, न कि पहले से सक्षम व्यक्ति को अतिरिक्त लाभ देना।
