February 16, 2026

राज्यसभा में संविधान पर दो दिवसीय चर्चा शुरू

निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस सरकारों पर किए हमले

नई दिल्ली: मौजूदा समय में संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है, जो 25 नवंबर से शुरू हुआ और 20 दिसंबर तक चलेगा। इस सत्र के 16वें दिन, यानी सोमवार(16 दिसंबर) को, राज्यसभा में संविधान पर दो दिवसीय चर्चा का आगाज हुआ। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस चर्चा की शुरुआत की। विपक्ष की ओर से राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे अपनी बात रखेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मंगलवार को इस चर्चा में हिस्सा लेंगे। संविधान की अहमियत पर चर्चा को लेकर यह सत्र बेहद अहम माना जा रहा है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट ने 1950 में आरएसएस की संगठनात्मक पत्रिका “ऑर्गनाइजर” और कम्युनिस्ट पत्रिका “क्रॉस रोड्स” के पक्ष में फैसला सुनाया था। लेकिन (तत्कालीन) अंतरिम सरकार ने इसके बाद संविधान में संशोधन कर दिया। देश की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगा दिया था। भारत, एक लोकतांत्रिक देश है, यह आज भी अपनी अभिव्यक्ति की आजादी पर गर्व करता है। देश की पहली अंतरिम सरकार ने ही संविधान में संशोधन किया जिसका मकसद भारतीयों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाना था।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि केशवानंद भारती मामले के फैसले के बाद तीन जजों को तत्काल प्रभाव से दंडित किया गया था, जबकि असहमति जताने वाले जज को प्रमोशन दे दिया गया। ओबीसी कमीशन को संवैधानिक दर्जा देने के लिए कांग्रेस ने कोई कदम नहीं उठाया। बाबा साहब आंबेडकर ने खुद कहा था कि पंडित नेहरू दलितों की भलाई को लेकर गंभीर नहीं थे। उनके मुताबिक, नेहरू ने अपने भाषणों में दलितों के हितों पर चर्चा नहीं की। सीतारमण ने कहा कि कांग्रेस ने बाबा साहब की तस्वीर सेंट्रल हॉल में लगाने की इजाजत नहीं दी। इसके साथ ही उन्हें भारत रत्न देने से भी इनकार कर दिया। अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में ही जीएसटी की नींव रखी थी, जबकि यूपीए सरकार ने 10 साल तक इस पर कोई एक्शन नहीं लिया।

सीतारमण ने राज्यसभा में 42वें संविधान संशोधन का जिक्र किया। सीतारमण ने कहा कि इस संशोधन के दौरान विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया गया था। बाद में 1978 में मोरारजी देसाई की सरकार ने 44वें संशोधन के जरिए इन प्रावधानों को हटाया गया। जयराम रमेश ने इस पर जवाब देते हुए कहा कि इंदिरा गांधी ने खुद इस संशोधन का समर्थन किया था। इस पर नेता सदन जेपी नड्डा ने कहा कि 42वें संशोधन के बाद जनता ने इंदिरा गांधी को हराकर सत्ता से बाहर कर दिया था। जयराम रमेश ने अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा कि मैंने भी यही बात कही थी।

वित्त मंत्री ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने संविधान की प्रस्तावना में सेक्युलर और सोशलिस्ट जैसे शब्द जोड़ने के लिए पूरे विपक्ष को जेल में डाल दिया। उन्होंने कहा कि लोकसभा में कांग्रेस के कुछ सदस्यों ने इसका विरोध किया था, लेकिन राज्यसभा में विपक्ष पूरी तरह से गैर मौजूद था। सीतारमण ने कहा कि मीसा कानून के तहत विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी की गई और उन्हें जेल में डाल में दिया गया।

निर्मला सीतारमण ने 1951 में कांग्रेस द्वारा किए गए संशोधन पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस ने अभिव्यक्ति की आजादी पर प्रतिबंध लगाया। सीतारमण ने कहा कि 1975 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में राजनारायण केस पेंडिंग होने के बावजूद कांग्रेस ने 39वें संशोधन के जरिए यह प्रावधान जोड़ दिया कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के निर्वाचन को अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती। वित्त मंत्री ने शाहबानो केस का भी जिक्र किया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ कांग्रेस ने कानून बनाकर मुस्लिम महिलाओं को न्याय से वंचित कर दिया।

राज्यसभा में चर्चा के दौरान निर्मला सीतारमण ने कहा कि संविधान जिस तरह से आगे बढ़ रहा है, वह भारत के लोकतंत्र के लिए गर्व की बात है। उन्होंने अभिव्यक्ति की आजादी पर नेहरू सरकार की कार्रवाई और संविधान सभा के सदस्य कामेश्वर सिंह का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर सवाल उठाए। उन्होंने मजरुह सुल्तानपुरी और बलराज साहनी की गिरफ्तारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस ने अभिव्यक्ति की आजादी को दबाया। साथ ही उन्होंने ‘किस्सा कुर्सी का’ फिल्म की रिलीज रोकने का जिक्र करते हुए भी कांग्रेस पर निशाना साधा।

अधिकारों और वादों के साथ आगे बढ़ेगा भारत
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत को आगे बढ़ाने के लिए वादों को पूरा करना और अधिकारों को सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। उन्होंने पिछले 75 साल की यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस ने समय-समय पर संविधान को अपने फायदे के लिए बदला। उन्होंने जनता को प्रेरित किया कि संविधान के मूल तत्वों को बचाने और मजबूत करने में योगदान दें।

बता दें कि कांग्रेस की ओर से मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने पहले संविधान पर चर्चा की मांग की थी। इसके बाद, 13 और 14 दिसंबर को लोकसभा में भी संविधान पर विशेष चर्चा हो चुकी है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा संविधान का दुरुपयोग किया और उसके इतिहास में संविधान को 75 बार संशोधित किया गया। मोदी का यह बयान कांग्रेस के लिए चुटकी लेने वाला था, जो पार्टी पर संविधान के साथ खेल खेलने के आरोपों को लेकर चर्चा में रहा।

राज्यसभा में 6 नए सांसदों ने ली शपथ
संसद के इस सत्र के दौरान राज्यसभा में छह निर्विरोध चुने गए सांसदों ने शपथ ली। ये सांसद विभिन्न दलों से हैं, जिनमें टीएमसी से रीताब्रत बनर्जी (पश्चिम बंगाल), भाजपा से रेखा शर्मा (हरियाणा), भाजपा से सुजीत कुमार (ओडिशा), टीडीपी से सतीश बाबू (आंध्र प्रदेश), टीडीपी से बी मस्तान राव यादव (आंध्र प्रदेश), और भाजपा से आर कृष्णैया (आंध्र प्रदेश) शामिल हैं। इन नए सांसदों के शपथ ग्रहण से राज्यसभा में नए चेहरों की एंट्री हुई है, जो आने वाले समय में संविधान पर और अन्य मुद्दों पर चर्चा में भाग लेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *