March 5, 2026

ओमान में अमेरिका और ईरान की अगली बैठक से पहले ट्रंप ने दी चेतावनी

वॉशिंगटन, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार जारी है। दोनों देशों के बीच शुक्रवार को स्थानीय समयानुसार सुबह 10 बजे ओमान में बातचीत होगी। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक बार फिर से धमकी दी है। बता दें, अमेरिका और ईरान के बीच पहले यह बैठक तुर्किए में होने वाली थी। हालांकि, ईरान ने बैठक तुर्किए में होने को लेकर ऐतराज जताया और ओमान का विकल्प दिया था। इस वजह से बाद में ओमान में बैठक आयोजित करने पर सहमति बनी। इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई को इस इलाके में अमेरिकी सेना की बढ़ती ताकत को लेकर चिंता करनी चाहिए। अगर तेहरान अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम फिर से शुरू करने की कोशिश करता है, तो यह हमलों का एक नया दौर शुरू करने का संकेत होगा।
ट्रंप ने एनबीसी न्यूज को दिए इंटरव्यू में खामेनेई के बारे में कहा- मैं कहूंगा कि उन्हें बहुत चिंता करनी चाहिए। हां, उन्हें चिंता होनी चाहिए।
ट्रंप कई हफ्तों से ईरान को भीषण हमले की चेतावनी दे रहे हैं। इससे पहले उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई के जवाब में सैन्य कार्रवाई की धमकी दी थी, जिसमें ईरानी सरकार पर हजारों लोगों को मारने का आरोप है। उन्होंने यह भी कहा है कि देश को नए नेतृत्व की जरूरत है।
इस बीच ईरान के विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा- अमेरिका के साथ न्यूक्लियर बातचीत शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे मस्कट में होने वाली है। मैं सभी जरूरी इंतजाम करने के लिए अपने ओमानी भाइयों का शुक्रगुजार हूं।
अमेरिकी राष्ट्रपति की धमकियों के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव और भी बढ़ा हुआ है। ट्रंप तेहरान पर उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम को कंट्रोल करने के लिए एक समझौते के लिए दबाव डाल रहे हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के अनुसार अमेरिका को न्यूक्लियर मुद्दे के अलावा कई दूसरी चिंताओं पर भी चर्चा करने की उम्मीद थी, जिसमें ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों, पूरे इलाके में प्रॉक्सी नेटवर्क के लिए समर्थन और अपने ही लोगों के साथ बर्ताव पर चर्चा शामिल है।
हालांकि, इससे पहले ईरान ने जब तुर्किए के बदले ओमान में चर्चा करने की मांग की, उस वक्त यह भी कहा कि दोनों पक्षों के बीच इस बैठक का दायरा सिर्फ न्यूक्लियर मुद्दों पर दो-तरफा बातचीत तक सीमित रखा जाए।

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