हिमाचल विधानसभा में सत्तापक्ष और विपक्ष का जबरदस्त हंगामा, सदन की कार्यवाही स्थगित
भाजपा का दावा- अपना बहुमत खो चुकी है सरकार
देश राज शर्मा, शिमला : हिमाचल प्रदेश विधानसभा में मंगलवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष ने एक-दूसरे के खिलाफ जबरदस्त हंगामा किया। नौबत यहां तक आ गई विधानसभा की कार्यवाही पहले कोरम पूरा न होने के कारण स्थगित कर दी गई और दूसरी बार सत्ता पक्ष और विपक्ष द्वारा एक-दूसरे के खिलाफ किए गए हंगामे के कारण बुधवार तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। इस दौरान विपक्षी दल भाजपा ने दावा किया कि सरकार ने अपना बहुमत खो दिया है। मंगलवार को भोजनावकाश के बाद उस समय हंगामा शुरू हुआ जब विपक्ष ने स्वास्थ्य विभाग को लेकर लाए गए कटौती प्रस्ताव को लेकर ध्वनिमत से करवाए गए मत विभाजन पर विपक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सदन की कार्यवाही शुरू होते ही यह मामला उठाया और कहा कि विपक्ष ने कटौती प्रस्तावों को मत विभाजन के लिए रखने की मांग की, लेकिन इसके विपरीत सदन में इसे ध्वनिमत से पारित करवा दिया गया। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने सदन में बहुमत खो दिया है, इसी कारण कटौती प्रस्तावों पर मत विभाजन से सरकार भाग गई। उन्होंने यहां तक कह डाला कि अब इस सरकार को तो भगवान भी नहीं बचा जा सकता। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने इस दौरान सरकार के बचाव करते हुए कहा कि सदन के भीतर कांग्रेस के 33 से अधिक विधायक मौजूद थे, जबकि विपक्ष के 25 विधायक उपस्थित थे। इसलिए अध्यक्ष ने ध्वनिमत से कटौती प्रस्तावों को नामंजूर करने का सही फैसला लिया। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष के विधायकों की संख्या कम होने पर ही मत विभाजन किया जाता है लेकिन सरकार के पास चूंकि बहुमत था, ऐसे में मत विभाजन का सवाल ही पैदा नहीं होता। इस दौरान भाजपा सदस्य विपिन परमार ने भी अपना पक्ष रखा और मत विभाजन न करवाए जाने पर ऐतराज जताया। इस दौरान दोनों ओर से शोर गुल होने लगा और देखते ही देखते हंगामा हो गया और सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोक-झोंक और नारेबाजी हुई। इस दौरान सदन में भारी हंगामे की स्थिति को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सदन की कार्यवाही बुधवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। बीबीएन की दवा कम्पनियों में एक वर्ष में 374 दवाओं के सैंपल हुए फेल विधानसभा में मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल ने कहा है कि पिछले एक वर्ष में बीबीएन क्षेत्र में 374 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं। जिनके सैंपल फेल हुए हैं, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की गई है और कुछ को ब्लैक लिस्ट भी किया गया है। उन्होंने कहा कि कई इकाइयों को शोकॉज नोटिस भी दिए हैं। उन्होंने कहा कि दवा की गुणवत्ता जांचने को अल्ट्रा मॉडर्न लैब को जल्द लोकार्पण किया जाएगा। इसका निर्माण 32 करोड़ रुपए की लागत से किया जा रहा है। वे विधायक केवल सिंह पठानिया और विपिन सिंह परमार के मूल और विधायक डॉ. जनक राज के अनुपूरक सवाल का जवाब दे रहे थे। कर्नल धनीराम शांडिल ने कहा कि दवाईयों की गुणवता जांच के लिए औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम,1940 में निहित प्रावधानों अनुसार समय-समय पर दवा निरीक्षकों द्वारा सैम्पल/नमूने लिए जाते हैं तथा इनकी गुणवता की जांच के लिए प्रदेश में स्थिति संयुक्त परीक्षण प्रयोगशाला, कण्डाघाट के साथ प्रदेश सरकार द्वारा अधिकृत क्षेत्रीय परीक्षण प्रयोगशाला चंडीगढ़ में इन नमूनों की जांच की जाती है। उन्होंने कहा कि यदि दवा के सैंपल की रिपोर्ट निर्धारित मानकों के विरुद्ध आती है तो उनके खिलाफ औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम,1940 के प्रावधानों अनुसार कार्रवाई की जाती है। विधायक केवल सिंह पठानिया ने कहा कि बार-बार दवाओं के सैंपल फेल होने की सूचनाएंं आ रही हैं और निकट भविष्य में ऐसा न हो, इसके लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। वहीं, विधायक विपिन सिंह परमार ने सवाल किया कि बीबीएन में फार्मास्यूटिकल हब में कितने दवा के सैंपल फेल हुए। उन्होंने पूछा कि दवा की गुणवत्ता को जांचने के लिए क्या अल्ट्रा मॉडर्न लैब स्थापित की जा रही है। विधायक डॉ. जनक राज ने सवाल किया कि दवा के सैंपल जांचने की क्या प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि ड्रग कंट्रोलर का पद कब तक भरा जाएगा। साथ ही कहा कि जिस कंपनी का दवा सैंपल फेल होता है, वह कंपनी फिर दूसरे नाम से लाइसेंस लेकर काम शुरू कर देती है। इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रदेश में कुल 677 दवा उद्योग हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा भारत सरकार की सहायता से बद्दी में दवा परीक्षण प्रयोगशाला का निर्माण किया जा रहा है ताकि अधिक संख्या में दवा के सैंपलों की जांच की जा सके और प्रदेश में किसी भी प्रकार की घटिया दवा के निर्माण और वितरण पर पूर्ण रूप से अंकुश लगाया जा सके। उन्होंने कहा कि विभाग में 39 औषधि निरीक्षक हैं जो इन विनिर्माण इकाइयों, बिक्री परिसरों और सरकारी अस्पतालों का निरीक्षण कर रहे हैं। फिर भी यदि कोई इकाई इस अधिनियम का उल्लंघन करती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही की जाती है। 10 साल की नियमित नौकरी के बाद कर्मचारी पेंशन का हकदार उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा है कि 10 साल की नियमित नौकरी के बाद कर्मचारी पेंशन के लिए पात्र होता है। उन्होंने कहा कि न्यू पेंशन योजना से पुरानी पेंशन योजना में 3899 कर्मचारियों को महालेखाकार द्वारा ओल्ड पेंशन के लिए प्राधिकृत किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने पांच साल की संविदा और 9 साल की नियमित नौकरी पूर्ण कर ली है, वे सरकारी विभागों में पेंशन के लिए पात्र नहीं है। हर्षवर्धन चौहान ने मंगलवार को प्रश्नकाल में विधायक लोकेंद्र कुमार के मूल और डॉ. जनक राज के अनुपूरक सवाल का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि अनुबंध के आधार पर की गई नौकरी को सीसीएस (पेंशन) नियम 1972 के तहत पेंशन लाभ के लिए नहीं गिना जाता है। उन्होंने कहा कि न्यूनतम सेवाकाल को पूर्ण न करने वाले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सरकार द्वारा पेंशन प्रदान करने का कोई विचार नहीं रखती है। नगर एवं योजना मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में विभिन्न व्यवसायों में प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। इन संस्थानों से उत्तीर्ण प्रशिक्षणार्थियों को प्लेसमेंट या रोजगार प्रदान करने के लिए इन संस्थानों के पास कोई कार्यक्रम या योजना नहीं है। हालांकि कई औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में विभिन्न कंपनियों की सहायता से कैंपस साक्षात्कार का आयोजन किया जाता है, जिसमें कई प्रशिक्षणार्थी कंपनियों में प्लेसमेंट/रोजगार प्राप्त कर लेते है। विधायक पवन कुमार काजल के सवाल के जवाब में धर्माणी ने कहा कि औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान इन कंपनियों को कैंपस साक्षात्कार के लिए स्थान इत्यादि की सुविधा प्रदान करवाते हैं। गत वर्षों में कैंपस साक्षात्कार के माध्यम से ऑपरेटर-कम-मैकेनिक के प्रशिक्षणार्थियों को कोई भी प्लेसमेंट/रोजगार प्रदान नहीं किया गया है। सभी विभागों को विधायक प्राथमिकता की लंबित योजनाओं की डीपीआर जल्द तैयार करने के निर्देश उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने सभी विभागों को विधायक प्राथमिकता की लंबित योजनाओं की डीपीआर जल्द तैयार करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही विधायक प्राथमिकताओं की योजना की डीपीआर तैयार करने के लिए 10 माह की समय सीमा तय की गई है, ताकि यदि कोई योजना अव्यवहारिक हो तो विधायक संशोधित प्राथमिकता दे सके। मंगलवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान विधायक दलीप ठाकुर के मूल तथा लोकेंद्र कुमार के अनुपूरक सवाल के जवाब में हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि कहा कि सरकार ने डीपीआर बनाने के लिए आउटसोर्स पर एजेंसी नियुक्त की हुई है। इससे पहले मूल सवाल के उत्तर में उन्होंने बताया कि गत 3 वर्षों में विधायक प्राथमिकता के तहत 1150 योजनाएं प्राप्त हुई, जिसमें 509 लोक निर्माण विभाग तथा 641 योजनाएं जल शक्ति विभाग की है। इसमें से 305 योजनाओं की डी.पी.आर. तैयार की जा चुकी है तथा 782 योजनाओं की डी.पी.आर. विभागों क पास लंबित है। इसमें 412 लोक निर्माण विभाग तथा 370 जल शक्ति विभाग की योजनाएं लंबित हैं। उन्होंने बताया कि गत 3 वर्षों में नाबार्ड ने 537 विधायक प्राथमिकता की योजनाओं के लिए 3214.25 करोड़ रुपए की धनराशि अनुमोदित की गई व 370 योजनाओं का कार्य आरंभ कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि इस दौरान नाबार्ड के तहत 243 सडक़ों व 14 पुलों के लिए 1712.25 करोड़ रुपए की धनराशि अनुमोदित की गई। विधानसभा में गूंजा ब्लूम्ज कालेज के छात्रों का मामला हिमाचल विधानसभा में मंगलवार को प्रश्नकाल के बाद विधायक विनोद कुमार ने मंडी जिले के नाचन विधानसभा क्षेत्र में स्थित ब्लूम्ज कॉलेज के 95 बीएड छात्रों का भविष्य दांव पर लगने का मामला सदन में उठाया। उन्होंने सरकार से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इन छात्रों को परीक्षा में बैठने के लिए रोल नंबर मिल जाए, क्योंकि इनकी परीक्षाएं पांच मार्च से शुरू होने वाली हैं। विनोद कुमार ने कहा कि इन 95 छात्रों को 12 दिसंबर, 2023 को आयोजित काउंसलिंग के बाद ब्लूम्ज कालेज में प्रवेश दिया गया था। उन्हें योग्यता के आधार पर प्रवेश दिया गया था, लेकिन अब उनका भविष्य दांव पर है, क्योंकि उन्हें पांच मार्च से शुरू होने वाली परीक्षाओं के लिए अपना रोल नंबर नहीं मिला है। विनोद कुमार ने मांग की कि सरकार को या तो सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी और ब्लूम्ज कालेज के बीच इस मुद्दे को सुलझाना चाहिए, या फिर इन बच्चों को किसी अन्य कालेज में स्थानांतरित करना चाहिए। विनोद कुमार ने कहा कि ये बच्चे रोल नंबर हासिल करने के लिए कालेज और विश्वविद्यालय से लेकर शिमला तक दौड़े हैं और शिक्षा मंत्री से भी मिले हैं, लेकिन इसके बावजूद उनकी समस्या का हल नहीं हुआ है। इस कारण इन बच्चों के मां-बाप भी बहुत चिंतित हैं। इस मुद्दे पर संसदीय कार्यमंत्री हर्षवर्धन चौहान ने आश्वासन दिया कि सरकार छात्रों के भविष्य को लेकर चिंतित है और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मामले का जल्द समाधान हो ताकि किसी भी छात्र का भविष्य दांव पर न लगे।
