January 26, 2026

तीन दिवसीय श्री कृष्ण कथामृत ” वन्दे जगद्गुरूम्” कार्यक्रम का आयोजन किया गया

सुखविंद्र, गगरेट, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान एवं श्री गीता मंदिर की ओर से तीन दिवसीय श्री कृष्ण कथामृत ” वन्दे जगद्गुरूम्” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। श्री गीता मंदिर, आदर्श नगर, नज़दीक फुटबॉल चौक, जालंधर में पहले दिन की कथा संपन्न हुई। कथा के पहले दिन श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री मेधावी भारती ने बताया कि भगवान श्री कृष्ण जब इस धरा धाम पर अवतरित हुए तो उन्होंने बहुत सारी लीलाएं की। आज भी इंसान इन लीलाओं को पढ़कर सुनकर भ्रमित हो जाता है। उसके मन में संशय पैदा हो जाते हैं। क्योंकि निर्गुण निराकार परमात्मा को समझना फिर भी सरल होता है पर वही निराकार ईश्वर जब साकार होकर अवतार लेकर अलग-अलग प्रकार की लीलाएं करता है तो उसे समझना जानना बहुत मुश्किल हो जाता है। अवतारी महापुरुष देह में स्थित होते हुए भी, देह द्वारा कर्म करते हुए भी, दैहिक नियमों से स्वतंत्र होते हैं। आसक्ति, वासना आदि लौकिक भावों से मुक्त होते हैं। इसलिए इन्हें लौकिक युक्तियों के द्वारा नहीं जाना जा सकता। उन्हें समझने का मापदंड भी अलौकिक ही होता है। वह अलौकिक मापदंड कुछ और नहीं अलौकिक नेत्र है। अध्यात्म की शब्दावली में इस अलौकिक नेत्र को दिव्य नेत्र कहा जाता है। पूर्ण गुरु द्वारा ब्रह्म ज्ञान में दीक्षित होने पर ही यह दिव्य नेत्र खुलता है। इसके खुलते ही हम अंतर जगत में भगवान की दिव्य अलौकिक लीलाओं के द्रष्टा बन जाते हैं। उसके बाद हममें बाहरी जगत में घटी हुई लीलाओं के शुद्ध भाव को समझने की क्षमता आती है और हम इन अवतारिय लीलाओं को पढ़कर व सुनकर भ्रमित नहीं होते, बल्कि उनके अलौकिक रस का पान करते हैं।
कथा के पहले दिन की सभा को विश्राम प्रभु की पावन आरती करके दिया गया। आरती में विशेष रूप से वामी सज्जानंद, रमन अरोड़ा (विधायक), समीर मरवाहा गोल्डी प्रधान, राजेंद्र गुप्ता (उद्योगपति), साध्वी पल्लवी भारती, साध्वी पूनम भारती जी, साध्वी वसुधा भारती जी, रमेश शर्मा, सुरेश सेठी, सुरिंदर सोनिक, वीना गुप्ता, कीर्ति गुप्ता और अन्य श्रद्धालुगण उपस्थित हुए। इस दौरान सारी संगत के लिए लंगर की व्यवस्था भी की गई।

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