February 20, 2026

चारधाम यात्रा पर जाने वाले भक्तजनों का इंतजार एक बार फिर बढ़ गया

नई दिल्ली, चारधाम यात्रा पर जाने वाले भक्तजनों का इंतजार एक बार फिर बढ़ गया है। ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए भक्तों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा। केदारनाथ, गंगोत्री, बदरीनाथ समेत चारों धामों के लिए श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या के मद्देनजर ऑफलाइन पंजीकरण पर लगी रोक को 31 मई तक बढ़ा दिया गया।

सचिवालय में चारधाम यात्रा की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसके निर्देश दिए। रजिस्ट्रेशन की ऑनलाइन व्यवस्था लागू रहेगी। इसके साथ यात्रियों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए टूर आपरेटर के लिए नई एडवाइजरी जारी करने को भी कहा।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से विस्तार से चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड आने वाला हर यात्री प्रदेश का अतिथि है। उसकी सुविधा, सहुलियत सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इस वर्ष यात्रियों की संख्या नए रिकार्ड स्थापित कर रही है। सभी यात्री सरलता और सहजता से भगवान के दर्शन कर सके, इसके लिए संख्या को नियंत्रित करना भी आवश्यक है। फिलहाल हरिद्वार, ऋषिकेश में किए जा रहे ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन को 31 मई तक पूरी तरह से बंद कर दिया जाए। मालूम हो कि अब तक यह रोक 19 मई तक लागू थी।

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन में यात्रियों की संख्या 30 लाख के पार हो चुकी है। हर धाम में तय मानक से दोगुने तक यात्री पहुंच रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यात्रा मार्ग एवं चार धाम में पेयजल व विद्युत आपूर्ति सुचारू बनाए रखने के निर्देश भी दिए। कहा कि तीर्थ यात्रियों की सुविधाओं का पूरा ख्याल रखा जाए।

बिना रजिस्ट्रेशन आने वाले यात्रियों को कराएंगे दूसरे तीर्थ-पर्यटन स्थलों के दर्शन
मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़ी संख्या में ऐसे यात्री भी उत्तराखंड आ रहे हैं, जिनका चारधाम यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। ऐसे यात्रियों के लिए पुलिस और पर्यटन विभाग मिलकर चार धाम से इतर अन्य धार्मिक-आध्यात्मिक स्थलों के दर्शन कराने के लिए कार्ययोजना तैयार कर रहें। इन यात्रियों को चारधाम यात्रा में नंबर आने तक दूसरे तीर्थ और पर्यटक स्थल से जोड़ा जा सकता है। मालूम हो कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर सूचना विभाग पिछले दो दिन से राज्य के प्रमुख तीर्थ-पर्यटन स्थलों की ब्रांडिंग के लिए सोशल मीडिया पर अभियान भी चला रहा है। छोटी छोटी रील्स के जरिए यात्रियों को हर तीर्थ स्थल की जानकारी दी जा रही है।

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