गुगा जाहर वीर के सेवक छत्र पूजा करके गुणगान के लिए नंगे पांव निकले गांव गांव
8 दिन गूगा जाहर वीर का करेंगे गुणगान
अजय कुमार, बंगाणा, उपमण्डल बंगाणा में रक्षा बंधन के साथ ही गूगा जाहर वीर की मंडलियां छत्त लेकर गांव गांव निकल पड़ी है। 30 अगस्त को रक्षा बंधन पर अशगुन भद्रा होने पर किसी भी सिद्ध अथवा गूगा मन्दिर में छत की पूजना नहीं हुई। 31 अगस्त को सुबह सुबह उपमण्डल बंगाणा में सभी धार्मिक स्थलों में छत्तों की पूजा करके गायबे के लिए मंडलियां निकल गई है। उपमण्डल बंगाणा की जसाना पँचायत के गांव लखरुंह में गूगा जाहर वीर मंडली भी वीरवार को सुबह छत्त की पूजा करके गुणगान के लिए निकल पड़ी है। इतिहास के पन्नों को देखा जाए तो गूगा और सिद्ध के जो छत्र चढ़ते है और मंडलियां गुणगान करती है यह बहुत पौराणिक कथाएं है। सतयुग से लेकर कलयुग तक इनका बहुत ज्यादा प्रभाव है। गूगा जाहर वीर की हर वर्ग पूजा करता है। और जब मंडलियां घर घर छत्र लेकर पहुंचती है तो गांव वासी मंडलियों के साथ साथ छत्र की भी विशेष पूजा करते है। रक्षा बंधन दिवस पर गूगा जाहर वीर अपनी बहन गुगड़ी के पास राखी बंधवाने के लिए आते है व गूगा नवमी के दिन वापिस जाते है। इसलिए गूगा जाहर वीर का गुणगान मंडलियां 8 दिन करती हैं। नंगे पांव एवम 8 दिन भूमि आसन और सादा भोजन करके यह मंडलियां गुणगान करती है। कलयुग में गूगा जाहर वीर एवम् 9 नाथ 84 सिद्ध 52 वीरों के छत्र भक्त चढ़ाकर गांव गांव गुणगान करते है। इन सभी में गूगा जाहर वीर को सबसे बड़ा माना गया है जो जहर उतारने और मानव जीवन को खुशहाल बनाने का आशीर्वाद देते है। इस मौके पर मदन राणा, शबीर पटियाल, राज कुमार, सुखदेव सिंह, पिंकू लखरुंह आदि दर्जनों भक्तों अपनी सेवाएं दे रहे है।
