विजय का भाव व्यक्त करने हेतु विजयदशमी का पर्व मनाया जाता है-गौरी शंकर
दौलतपुर चौक : ( संजीव डोगरा)
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 98 वें स्थापना दिवस व विजयादशमी के दृष्टिगत भंजाल में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें आरएसएस स्वयंसेवकों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में आरएसएस के जिला प्रचारक गौरी शंकर ने शिरकत की,जबकि इस मौके पर खण्ड कार्यवाह राजीव कुमार अध्यक्ष के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत ध्वजारोहण एवम शस्त्र पूजा के साथ हुई,ततपश्चात मुख्यवक्ता गौरी शंकर ने अपने सम्बोधन में कहा कि विजय का भाव व्यक्त करने हेतु विजयदशमी का पर्व मनाया जाता है ताकि लोग जिंदगी में कभी भी मानसिक संकीर्णता एवम गुलामी को स्वीकार न करें। उन्होंने बताया कि दुनिया के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 27 सितंबर 1925 को विजयदशमी के दिन डॉ केशव बलराम हेडगेवार ने की थी ताकि भारत को हिंदू राष्ट्र बनाया जा सके। उन्होंने बताया कि ‘नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे’ प्रार्थना के साथ पिछले कई दशकों से लगातार देश के कोने कोने में संघ की शाखायें लग रही हैं। उन्होंने बताया कि 2025 तक आरएसएस की मंडली अथवा शाखा देश के हर गांव /मुहल्ले तक पहुंचाने का प्रयास जारी है।आरएसएस साफ तौर पर हिंदू समाज को उसके धर्म और संस्कृति के आधार पर शक्तिशाली बनाने की बात करता है। उन्होंने बताया कि एकता और अखण्डता की पहली शर्त है कि भेद रहित समाज हो और यह तभी संभव है जब सामाजिक समरसता के लिए सभी समाज और पंथ धर्म के लोग आपस मे उत्सव, त्यौहार मिलकर मनाएं। उन्होंने बताया कि हम किसी को पराया नहीं मान सकते, आत्मीयता और समाज मे संतुलन ही आध्यात्मिक भारतीयता है। इस अवसर पर मिष्ठान वितरित करके सभी को विजयदशमी की बधाई दी गयी। इस मौके पर मोहन लाल शर्मा, सर्वजीत सिंह, राजेश ठाकुर, सुशील कालिया, विश्वजीत पटियाल, अनिरुद्ध, अरुण शर्मा, अजय, राजेश डोगरा, अनिरुद्ध, शिव प्रताप, चिराग इत्यादि उपस्थित रहे।
