March 12, 2026

प्रबंधन द्वारा पानी जमा करते ही तुरंत पहुंचे परिंदे

 कुल्लू : अमूमन सर्दियों में दस्तक देने वाले प्रवासी परिंदे इस बार सात महीने देरी से लारजी पहुंच गए हैं। कारण यह नहीं कि प्रवासी परिंदों को प्रदेश की आवोहवा रास नहीं आई बल्कि जुलाई माह में आई बाढ़ के चलते लारजी परियोजना प्रबंधन ने झील में पानी जमा नहीं किया जिस कारण परियोजना की झील खाली थी। अब प्रदेश सरकार के हाइड्रो प्रोजेक्ट प्रबंधन ने जलाशय में पानी भर दिया है जिस कारण बसंत ऋतु में लारजी की कृत्रिम झील में विदेशी सारस प्रजाति के पक्षियों ने अठखेलियां खेलनी शुरू कर पानी की गहराई में नापनी शुरू कर दी है। लारजी जल विद्युत परियोजना की झील में रंग बिरंगे विदेशी परिंदों ने दस्तक दे दी है। खास बात यह है कि जलाशय में कई दुर्लभ प्रजाति के परिंदे देखे जा रहे हैं। बसंत ऋतु आगमन के साथ ही हजारों किलोमीटर दूर से आकर कुल्लू जिला में बिजली तैयार करने के लिए बनाई गई कृत्रिम झील विदेशी मेहमान परिंदों से गुलजार हुई है। साइबेरिया, रूस, कजाकिस्तान आदि देशों से विदेशी पक्षियों ने यहां डेरा डाल दिया है। खुशी की बात यह है कि ये विदेशी मेहमान आम लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। वन्य प्राणी विभाग के विशेषज्ञ कहते हैं कि विदेशी पक्षियों का सफर इतना आसान नहीं होता है। रास्ते में बहुत सी मुश्किलें आती हैं। आंधी, तूफान और तेज हवाओं से कई पक्षी अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं। उल्लेखनीय है कि साइबेरिया, रूस आदि देश बहुत ही ठंडी जगह है, जहां नवंबर से मार्च तक तापमान 50 से 60 डिग्री नीचे तक चला जाता है इस कारण पक्षियों का जिंदा रहना बहुत मुश्किल हो जाता है, इसलिए हजारों पक्षी भारत की ओर रुख करते हैं। दूर देश से आए इन मेहमान पक्षियों की खातिरदारी में प्रदेश के नागरिक कोई कोर कसर नहीं छोड़ते। सुबह सूर्य की पहली किरण के साथ पेड़ पौधों के बीच से निकलकर ये पक्षी स्वच्छ पानी में अठखेलियां करने लगते हैं। विदेशी परिंदों के दस्तक देते ही घाटी के पर्यावरण प्रेमी खुश नजर आ रहे हैं। वन्य प्राणी विभाग के रिटायर्ड अधिकारी जोगिंदर सिंह ने बताया कि इन प्रवासी मेहमानों का मुख्य भोजन जलीय वनस्पति, जलीय कीट तथा छोटी मछली ही होता है जबकि उनका प्रजनन का समय अप्रैल-मई के दौरान होता है। उन्होंने बताया कि यह प्रवासी परिंदे हजारों की संख्या में नजर आएंगे, जो हवा में उड़ते हैं और पानी में तैरते हैं। यह पक्षी झील में गहरा गोता लगाकर मछलियों का आहार बनाते हैं। उधर ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क की अरणयपाल मीरा शर्मा ने बताया कि हर वर्ष देश विदेश से सैकड़ों पक्षी पहुंचते हैं तथा इन विदेशी मेहमानों की सुरक्षा के लिए वन्य प्राणी विभाग द्वारा विशेष प्रबंध किए गए हैं। 

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