स्वामी विकास दास जी महाराज को प्रयागराज महाकुंभ में मिली जगतगुरु की उपाधि
अजय कुमार ऐरी, नंगल: भाखड़ा बांध के निकट स्थित पवित्र नरसिंह मंदिर एवं मोहरा धाम, अंबाला के परम श्रद्धेय महामंडलेश्वर स्वामी विकास दास जी महाराज को प्रयागराज महाकुंभ में जगतगुरु की प्रतिष्ठित उपाधि से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें आध्यात्मिक ज्ञान, समाज सेवा और निस्वार्थ मार्गदर्शन के प्रति उनकी गहन निष्ठा के लिए प्रदान किया गया। स्वामी जी दिगंबर अखाड़ा से संबंधित हैं, जो सनातन धर्म की आध्यात्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
जगतगुरु की उपाधि प्राप्त करने के बाद जब स्वामी विकास दास जी महाराज नंगल पहुंचे, तो बीबीएमबी के सीनियर एक्सियन विनोद शर्मा व उनकी पत्नी प्रेम लता के नेतृत्व में भक्तों ने उनका भव्य स्वागत किया। श्रद्धालुओं ने फूलमालाओं से उनका अभिनंदन किया और उनके चरणों में श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। इस दौरान सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे स्वामी जी के बताए आध्यात्मिक मार्ग और सत्कर्मों का अनुसरण करते रहेंगे।
स्वामी जी ने युवाओं से आग्रह किया कि वे जीवन में सच्चे ज्ञान को आत्मसात करें और समाज में प्रेम, करुणा और एकता का संचार करें। उन्होंने यह भी कहा कि धर्म और आध्यात्मिकता के ज्ञान को सभी अपने जीवन में अपनाने के लिए भी जरूर गंभीरता दिखाएं।
— समाज सेवा में अग्रणी भूमिका—
स्वामी विकास दास जी महाराज वर्षों से समाज सेवा, गरीबों की सहायता, और आध्यात्मिक शिक्षा के प्रसार में सक्रिय हैं। नरसिंह मंदिर और मोहरा धाम को आध्यात्मिक साधना का केंद्र बनाने के साथ-साथ उन्होंने जरूरतमंदों के लिए अनेक कल्याणकारी कार्य किए हैं। उनके मार्गदर्शन में निस्वार्थ सेवा की परंपरा को नई दिशा मिली है।
महाकुंभ में ऐतिहासिक सम्मान—
प्रयागराज महाकुंभ, जो अपने धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व के लिए विश्व प्रसिद्ध है, वहां जगतगुरु की उपाधि मिलना एक अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण है। यह उपाधि न केवल स्वामी विकास दास जी महाराज की साधना और समर्पण का सम्मान है, बल्कि उनके अनुयायियों और भक्तों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।
