January 27, 2026

सुखबीर सिंह बादल पर हमला, बाल बाल बचे

एक शख्स ने अमृतसर में स्वर्ण मंदिर के गेट पर उन पर गोली चलाई

अमृतसर: अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल पर बुधवार को एक जानलेवा हमला हुआ है। पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बाल बाल बचे है। बताया जा रहा है कि एक शख्स ने गोल्डन टेंपल के गेट पर उन पर गोली चला दी। इस फायरिंग के बाद स्वर्ण मंदिर के बाहर हड़कंप मच गया। हालांकि, वहां मौजूद लोगों ने हमलावर को पकड़ लिया है। बता दें कि सुखबीर सिंह बादल इन दिनों स्वर्ण मंदिर के बाहर दरबान बनकर धार्मिक सजा के रूप में अपनी सेवा दे है। पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह पर यह जानलेवा हमला तब हुआ, जब वह गोल्डन टेंपल के बाहर दरबान बनकर धार्मिक सजा के रूप में अपनी सेवा दे रहे थे। तभी एक हमलावर ने सामने से आते हुए उन पर गोली चला दी। हालांकि यह गोली किसी को नहीं लगी। हमलावर की नियत भांपते ही वहां मौजूद एक शख्स ने गोली चलाने वाले का बाजू एकदम ऊपर कर दिया व हवा में फायर हुआ। गेट पर खड़े लोगों ने हमलावर को पकड़ लिया। गोली की आवाज सुनते ही वहां पर मौके पर मौजूद लोगों ने हमलावर को दबोच लिया। बाद में उसको पुलिस के हवाले कर दिया। आरोपी के पास से पिस्तौल जब्त कर ली गई है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, आरोपी का नाम नारायण सिंह बताया जा रहा है। हमलावर दल खालसा से जुड़ा हुआ है। पुलिस यह पूछताछ कर रही है कि किसके कहने पर उसने यह हमला किया है।
आपको बता दें कि सोमवार को शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को अकाल तख्त साहिब पर पंच सिंह साहिबों के सामने हाजिर हुए थे। अकाल तख्त के जत्थेदारों ने सुखबीर बादल और उनकी कैबिनेट में रहे मंत्रियों को दोषी ठहराते हुए तनखाह (धार्मिक कदाचार का दोषी) सुनाई है, जिसका उनको पालन करना होगा। सिखों की सर्वोच्च संस्था अकाल तख्त ने 2 महीने पहले पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्रियों को ‘तनखैया’ घोषित किया था।
सुखबीर सिंह बादल ने कबूल जुर्म
सुखबीर सिंह बादल ने अकाल तख्त साहिब के सामने अपनी गलतियां को कबूल किया। उन्होंने ईशनिंदा मामले में सिरसा डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को माफी देने की बात स्वीकार की है। पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री ने निर्दोष सिखों की हत्या में शामिल पुलिस अधिकारियों को बढ़ावा देने की बात भी स्वीकार की। इसके साथ ही उन्होंने राम रहीम की माफी को लेकर अखबारों में विज्ञापन देने की बात भी कबूल की।

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