भाखड़ा डैम की शैक्षणिक यात्रा से छात्रों ने हासिल किया पर्यावरणीय व वैज्ञानिक ज्ञान का अनुभव
नंगल, अजय कुमार ऐरी: सरकारी कन्या सीनियर सेकेंडरी स्कूल नंगल की 12वीं कक्षा की विज्ञान संकाय की छात्राओं ने हाल ही में एक शैक्षणिक यात्रा के अंतर्गत भाखड़ा डैम का दौरा किया। इस यात्रा में कैंपस मैनेजर शसुधीर शर्मा के साथ गाइड शिक्षिकाएं मीनाक्षी, हरश कपिला और नलिनी भी शामिल रहीं। उन्होंने बताया कि यह शैक्षणिक भ्रमण पंजाब शिक्षा विभाग के मार्गदर्शन में जिला शिक्षा अधिकारी संजीव गौतम और उप-जिला शिक्षा अधिकारी सुरिंदर पाल सिंह के निर्देशानुसार प्रधानाचार्य विजय बंगला की अगुवाई में आयोजित किया गया। इस यात्रा का उद्देश्य छात्रों को व्यावहारिक रूप से पर्यावरण, जल संसाधन और पनबिजली उत्पादन की प्रक्रिया से अवगत कराना था।
पंजाब और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित भाखड़ा डैम भारत के सबसे विशाल बांधों में से एक है, जो जलविद्युत उत्पादन और सिंचाई के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत है। अपनी भव्य संरचना और ऐतिहासिक महत्व के कारण यह डैम न केवल तकनीकी दृष्टि से अद्वितीय है, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है।
यात्रा के दौरान छात्राओं को डैम की संरचना, इसके जल प्रबंधन तंत्र और पर्यावरणीय प्रभावों की विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने जाना कि किस प्रकार डैम जलवायु संतुलन को प्रभावित करता है और कैसे जल संसाधनों का संरक्षण किया जाता है।
— पर्यावरणीय जागरूकता और व्यावहारिक अनुभव–
इस दौरे ने छात्राओं को जल संरक्षण, ऊर्जा उत्पादन और पर्यावरणीय चुनौतियों को समझने का अवसर प्रदान किया। उन्होंने देखा कि कैसे जलविद्युत संयंत्र अक्षय ऊर्जा के स्रोत के रूप में कार्य करता है और किस प्रकार पर्यावरणीय सततता को बनाए रखने के लिए विभिन्न तकनीकों का उपयोग किया जाता है।
प्रधानाचार्य विजय बंगला ने बताया कि शैक्षणिक यात्राएं विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान से बाहर निकलकर वास्तविक जीवन की प्रक्रियाओं को समझने में सहायता करती हैं। यह यात्रा न केवल उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण को विकसित करेगी, बल्कि उन्हें पर्यावरण संरक्षण की ओर भी प्रेरित करेगी।”
—सरकारी पहल और भविष्य की दिशा—-
यह शैक्षणिक यात्रा पंजाब सरकार की उस पहल का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को राज्य के प्राकृतिक और तकनीकी चमत्कारों से परिचित कराना है। सरकार इस प्रकार के शैक्षणिक दौरों को बढ़ावा देकर छात्रों में जिज्ञासा और खोज की भावना को प्रोत्साहित कर रही है।
छात्राओं ने इस यात्रा से प्रेरित होकर पर्यावरण संरक्षण और जल संसाधनों के सतत उपयोग के लिए अपने स्तर पर प्रयास करने का संकल्प लिया। यह अनुभव उनके शैक्षणिक जीवन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
