February 17, 2026

धर्मशाला में कॉलेज छात्रा की मौत मामले में आरोपी प्रोफेसर के बचाव में उतरा स्टाफ

धर्मशाला । हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला से एक बेहद गंभीर और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। सरकारी कॉलेज में कथित रैगिंग और यौन उत्पीड़न से मानसिक रूप से परेशान 19 वर्षीय छात्रा पल्लवी की इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना के बाद शिक्षा संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा, प्रशासनिक संवेदनशीलता और पुलिस की भूमिका पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। छात्रा के पिता विक्रम कुमार के बयान के आधार पर पुलिस ने तीन छात्राओं और एक कॉलेज प्रोफेसर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। विक्रम कुमार ने कॉलेज प्रशासन, पुलिस और समाज की सोच पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कॉलेज में छात्रा के साथ न केवल सीनियर छात्राओं ने दुर्व्यवहार किया, बल्कि एक प्रोफेसर ने भी उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। उन्होंने जातिसूचक शब्द कहे जाने और लगातार टॉर्चर का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी बेटी इस मानसिक यातना को सह नहीं सकी। अगर शुरुआती दौर में पुलिस और कॉलेज प्रशासन ने गंभीरता दिखाई होती, तो शायद उनकी बेटी जिंदा होती।
उधर, एबीवीपी ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए पुलिस और कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है। एबीवीपी की प्रांत मंत्री नैंसी अटल ने कहा कि इस पूरे मामले में वो पीड़ित परिवार के साथ हैं। पुलिस और कॉलेज की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए उन्होंने कहा कि समय रहते अगर इनकी ओर से इस घटना पर संज्ञान लिया गया होता तो शायद आज ऐसा देखने को न मिलता। उन्होंने पुलिस पर भी जिम्मेदारी से भागने का आरोप लगाया और कहा कि अपराधिक घटना के दौरान समय पर तो ये कार्रवाई करते नहीं हैं, जिसकी वजह से छात्रों को परेशानी होती है।
हालांकि कॉलेज के अन्य प्रोफेसरों ने आरोपी प्रोफेसर का पक्ष लेते हुए आरोपों को निराधार बताया है। कॉलेज प्रिंसिपल राकेश पठानिया ने संवेदना जताते हुए कहा कि छात्रा पूर्व में कॉलेज की छात्रा रही है, लेकिन इस सत्र में उसका नामांकन नहीं हुआ था। छात्रा शैक्षणिक रूप से अयोग्य पाई गई थी और यूनिवर्सिटी नियमों के तहत उसे आगे की कक्षा में प्रवेश नहीं दिया जा सकता था। कॉलेज में रैगिंग को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति है और कोई औपचारिक शिकायत कॉलेज को प्राप्त नहीं हुई।
एएसपी वीर बहादुर ने बताया कि यह प्रकरण पहले मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक भी पहुंचा था। पुलिस का कहना है कि जैसे ही मामले की जानकारी मिली, पीड़ित परिजनों से संपर्क किया गया, लेकिन उस समय छात्रा इलाज के लिए बाहर थी। छात्रा की मौत के बाद अब पूरे मामले की विधिवत जांच शुरू कर दी गई है।

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