February 19, 2026

शिमला मस्जिद विवाद: भाईचारे की दुहाई देकर मुस्लिम मस्जिद के अवैध हिस्से को गिराने को तैयार

शिमला: शिमला में अवैध मस्जिद को लेकर चले विवाद के बीच संजौली मस्जिद और अन्य मस्जिदों के इमामों ने प्रशासन को अपना ज्ञापन दिया है जिसमें उन्होंने मस्जिद के अवैध हिस्से को खुद ही हटाने की बात कही है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि आज मुल्क को भाईचारे की जितनी ज्यादा जरूर है, शायद ही इतनी कभी रही हो। वक्त की जरूरत को मद्देनजर रखते हुए हमने ये फैसला लिया है। बता दें कि हिमाचल प्रदेश के शिमला के संजौली में मस्जिद में अवैध निर्माण को लेकर एक बार फिर से जमकर बवाल देखने को मिला। 11 सितंबर को संजौली में धारा 163 टूट गई और पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प भी हुई। पुलिस को लाठीचार्ज तक करना पड़ा था। हिमाचल प्रदेश के मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि कल संजौली में विरोध प्रदर्शन हुआ था, ये बड़े पैमाने पर हुआ था और इसमें कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे, वो अस्पताल में हैं और कुछ प्रदर्शनकारी भी इसमें घायल हुए थे। हमने कल कहा था यह भी कि हमारी सहानुभूति उनके साथ है, लेकिन कानून अपनी प्रक्रिया पूरी करेगा और कर रहा है, सरकार कानून के मुताबिक काम करती है। आज एक बड़ा घटनाक्रम यह हुआ है कि मस्जिद कमेटी के पदाधिकारी आज कमिश्नर से मिले और उन्होंने कहा है कि सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए हम इस जगह को सील करने के लिए तैयार हैं, इसके लिए उन्होंने नगर आयुक्त को लिखित पत्र दिया है। नगर आयुक्त इस पर कार्रवाई करेंगे, इसे सील कर दिया जायेगा। उन्होंने यह भी कहा है कि कमिश्नर की अदालत में जो भी निर्णय आयेगा वे इसका भी सम्मान करेंगे। मुस्लिम मौलवी ने शिमला के नगर निगम आयुक्त भूपेन्द्र कुमार अत्री से मुलाकात की। शिमला के जामा मस्जिद के इमाम मुफ्ती मोहम्मद शफ़ी कासमी ने कहा कि हमने इसमें (ज्ञापन) कहा है कि इस क्षेत्र में इस सीमावर्ती राज्य में भाईचारे (समुदायों के बीच) की एक बड़ी आवश्यकता है। हम हमेशा यहां रहते हैं सद्भावना बनाए रखने के लिए यदि कोई हिस्सा (मस्जिद का) अवैध है, तो हमें बताएं और हम इसे स्वयं हटाने के लिए तैयार हैं। संजौली मस्जिद के इमाम शैजाद आलम का कहना है कि हमने यह आवेदन इसलिए दिया क्योंकि हिमाचल प्रदेश के सभी लोग दशकों से सद्भाव के साथ रह रहे हैं। हम भविष्य में भी सद्भाव और प्रेम से रहना चाहते हैं।’ इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। इसलिए हमने यह आवेदन दिया कि हम उस हिस्से को खुद ही तोड़ देंगे। हम ऐसा किसी के दबाव में नहीं कर रहे हैं, हम पर सिर्फ दबाव है कि सौहार्द बनाए रखना है।

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