पुराने नियमों के तहत हो शास्त्री की भर्ती
बेरोजगार शास्त्री संघ ने किया प्रदेश सरकार से आग्रह
दौलतपुर चौक : (संजीव डोगरा) शिक्षा विभाग में शास्त्री भर्ती की विज्ञप्ति जारी हो गई है और भर्ती के नियमों को बदल दिया गया है। शिक्षा विभाग और सरकार के द्वारा शास्त्रियों के साथ अन्याय किया गया है। एकदम से नए नियम थोपना बिल्कुल भी सही नहीं है। अभी इससे पहले बैकलॉग शास्त्री कोटे में भर्ती हुई है जिसमे पुराने ही नियम थे। परन्तु एक महीने के अंतराल में ही नियम बदल दिए गए ये सरासर अन्याय है। बेरोजगार शास्त्री संघ के प्रदेशाध्यक्ष लेखराज ने अपने वक्तव्य में प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि जिस तरह पूर्व में भर्तियां होती थी और हो भी रही थी उसी तरह आगे भी भर्तियां पुराने नियमो से ही होनी चाहिए। क्योंकि यदि शास्त्रों को अन्य महविद्यालयों में पढ़ाया जाता तो प्रदेश सरकार को अलग से संस्कृत महाविद्यालय क्यों खोलने की जरूरत होती। उन्होंने कहा कि इस बात के उपर प्रश्न चिन्ह उठता है की एक विषय में पढ़ने वाले को कैसे योग्य मान लिया गया जो की बिल्कुल भी मान्य नहीं है । संघ ने मांग की है की जो शास्त्री भर्ती की जा रही है वह पुराने नियमों के तहत ही होनी चाहिए। क्योंकि वर्तमान में हिमाचल प्रदेश सरकार के प्रत्याभूत कोई ऐसा प्रशिक्षण केंद्र नहीं है जहां से शास्त्री बीएड कर सकें। विश्विद्यालय में भी शास्त्री की संस्कृत विषय में बीएड करने का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में शास्त्री की भर्ती में कैसे बीएड को लागू किया गया है। शास्त्री संघ के प्रदेशाध्यक्ष ने कहा है कि शास्त्री उत्तीर्ण करने के बाद टेट परीक्षा पास करने के बाद ही शास्त्रियों को रोजगार का अवसर मिलता है। जिससे भी उनको वंचित किया जा रहा है। हालांकि कुछ संगठन सरकार से मिलकर नए नियमों के आधार पर ही भर्ती करने की मांग कर रहे है। इससे पहले इन संगठनों का कोई नाम भी नही था जो अपने स्वार्थ बस इस समय सामने आ गए हैं। ये सिर्फ स्वार्थ को देखता हुए सरकार और शिक्षा विभाग को गुमराह कर रहे है। संघ का कहना है की शास्त्रीयों की भर्ती ओटी शास्त्री के तहत ही करने की मांग को जायज मानते हुए पुराने नियमों से भर्ती की जाए। सरकार और शिक्षा विभाग से अनुरोध है कि जो शास्त्री की भर्ती की जा रही है वह पुराने नियमों के तहत ही हो। जो की उच्चित और सर्व मान्य है। जिससे की संस्कृत महाविद्यालयों का सरंक्षण भी होगा और और शास्त्रों और वेद पुराणों की भी मर्यादा बनी रहेगी। इस तरह से सभी संस्कृत महाविद्यालय बंद हो जाएंगे। एक तरफ सरकार संस्कृत को राज्य की द्वितीय भाषा का दर्जा दे रही है दूसरी तरफ संस्कृत और वेद पुराणों के साथ मजाक किया जा रहा है । इस बात को ध्यान में रखते हुए विभाग और सरकार शास्त्री की भर्ती प्रक्रिया में पुराने नियमों के तहत भर्ती करे। इस अवसर पर संघ के सदस्यों में प्रदेशाध्यक्ष लेखराज, राजकुमार, छोटा राम, पुरषोत्तम, पवन, राकेश, मदन, शांडिल्य, व्याकरणाचार्य प्रेम शर्मा, ज्योतिषाचार्य विक्रांत शर्मा, यशपाल, सुनील, नरेश शर्मा, ललित,अमित, लखन पाल, पंकज,पंकज गौतम, प्रदीप, प्रवीण शर्मा,
नर्वदा, मोनिका, अंजली, यश पाल चंबा,अंजना ऊना ललित शर्मा,मदन ,कृष्णशर्मा मदन, नितेश, राजेश शर्मा, रोशनलाल, शीतल शर्मा सुनिल भरद्वाज, सुनील दत्त, सुरेंद्र गर्ग, अभिषेक शैल, सुरेश कुमार, विक्रम शांडिल्य,आचार्य विनोद शर्मा, अजय शर्मा, अमन गौतम,अनिल नड्डा, हेमंत नालागढ़, देवराज शर्मा, दिनेश, गिरधारी, हेमप्रकाश, हितांशी शर्मा, कमल चंद, कमलेश शर्मा, कनिका, केशव शर्मा, कपिल शर्मा, कार्तिक, ओंकार शर्मा, कश्मीर चंद, पंकज कौशल इत्यादि सैंकड़ों शास्त्रियों ने मिलकर सरकार से गुहार लगाई है। उन्होंने यह भी जताया है कि संस्कृत और संस्कृति को बचाने के लिए सरकार जल्द ही कोई फैसला नहीं लेती है तो मजबूरी बस संस्कृत छात्रों को उचित कदम उठाना पड़ेगा जो की सरकार और संस्कृति के लिए सही नहीं होगा।
