March 14, 2026

शेयर बाजार में स्वाहा हुए निवेशकों के 10 लाख करोड़ रुपये

सेंसेक्स-निफ्टी क्रैश होने के पीछे हैं ये कारण

मुंबई, शेयर बाजार के निवेशकों के लिए गुरुवार का दिन किसी बुरे सपने से कम साबित नहीं हुआ। बाजार खुलते ही बिकवाली का ऐसा भयंकर तूफान आया कि सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ताश के पत्तों की तरह ढह गए। अपनी गाढ़ी कमाई लगाकर मुनाफे की उम्मीद कर रहे आम निवेशकों के पोर्टफोलियो को तगड़ा झटका लगा है। दिनभर चले भारी उतार-चढ़ाव के बाद सेंसेक्स 829 अंक टूटकर 76,034 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 227 अंक फिसलकर 23,639 पर आ गया। इस चौतरफा हाहाकार के बीच मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई है।

गुरुवार की इस तेज बिकवाली के कारण चंद घंटों में ही निवेशकों की संपत्ति में करीब 10 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम सेंध लग गई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 450 लाख करोड़ रुपये से गिरकर सीधा 440 लाख करोड़ रुपये रह गया है।

भारतीय बाजार को सबसे गहरा घाव कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों ने दिया है। होर्मुज स्ट्रेट में तेल ले जा रहे जहाजों पर ईरान के हमले की खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड ऑयल लगभग 9 फीसदी की छलांग लगाकर 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। दुनियाभर में ऊर्जा सप्लाई चेन को लेकर गहरा संकट पैदा हो गया है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने इतिहास में पहली बार आपातकालीन तेल भंडार खोलने का ऐलान जरूर किया, लेकिन इसका कीमतों पर कोई खास असर नहीं दिखा। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, ऐसे में महंगे क्रूड का सीधा मतलब देश की अर्थव्यवस्था पर महंगाई का बोझ बढ़ना है।

बाजार की इस भयंकर गिरावट के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त नीतियां और ग्लोबल मार्केट का दबाव भी एक बड़ी वजह है। अमेरिका ने भारत समेत 16 देशों के खिलाफ ‘अनफेयर ट्रेड’ की नई जांच शुरू कर दी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर बुरा असर पड़ने की आशंका गहरा गई है। ग्लोबल ट्रेड की इस अनिश्चितता के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भी भारतीय बाजार से मुंह मोड़ लिया है। मार्च महीने में ही विदेशी निवेशक अब तक 39,100 करोड़ रुपये से ज्यादा निकाल चुके हैं और लगातार नौवें दिन बिकवाली करते हुए उन्होंने 6,267 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं।

कच्चे तेल की इस आग और विदेशी फंड्स की निकासी का सीधा प्रहार हमारी मुद्रा पर पड़ा है। गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 30 पैसे की भारी कमजोरी के साथ 92.34 के स्तर पर पहुंच गया। यह रुपये का अपने ऑलटाइम लो (ऐतिहासिक निचले स्तर) के बेहद करीब पहुंचना है। कमजोर होता रुपया आम आदमी और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए एक बड़ा खतरे का संकेत है, क्योंकि इससे देश का आयात बिल बढ़ता है और चालू खाते का घाटा बढ़ने का जोखिम पैदा हो जाता है।

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