February 25, 2026

आपदा की दृष्टि से मौजूदा संरचनाओं का होगा पुनः सुदृढ़ीकरण: डीसी

जिला में नदी, नालों के तटीकरण तथा भूस्खलन से मार्गों की सुरक्षा की तैयारी

धर्मशाला, आपदा की दृष्टि से मौजूदा सरंचनाओं का पुनः सुदृढ़ीकरण पर विशेष बल दिया जाएगा इस के लिए लोक निर्माण विभाग, जल शक्ति विभाग, वन विभाग, नगर निकायों को आवश्यक प्रोजेक्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

इस बाबत डीसी कार्यालय के सभागर में उपायुक्त डा निपुण जिंदल ने आपदा प्रबंधन को लेकर आवश्यक बैठक भी आयोजित की गई। इसमें कांगड़ा जिला में आपदा की दृष्टि से बाढ़, भूस्खलन से सड़कों, पेयजल योजनाओं तथा आवासीय क्षेत्रों को होने वाले नुक्सान से बचाने के लिए आवश्यक प्रोजेक्ट तैयार करने पर विशेष चर्चा की गई।

30 जुलाई से पहले डीपीआर तैयार के दिए निर्देश

उपायुक्त डा निपुण जिंदल ने कहा कि उपमंडल स्तर पर लोक निर्माण विभाग, जल शक्ति विभाग, वन विभाग तथा स्थानीय नगर निकायों के अधिकारी आवश्यक बैठक आयोजित करें जिसमें आपदा से बचाव के लिए आवश्यक प्लान तैयार करें तथा उसी के आधार पर विभिन्न कार्यों जैसे नदी, नालों के तटीयकरण तथा भूस्खलन की दृष्टि से संवदेनशील मार्गों में सुरक्षा दीवार इत्यादि को लेकर डीपीआर तैयार करें ताकि डीपीआर स्वीकृति के लिए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को भेजी जा सके।

डीपीआर स्वीकृति के लिए राज्य आपदा प्रबंधन को भेजी जाएंगी

उपायुक्त डा निपुण जिंदल ने कहा कि विभिन्न विभागों से आपदा प्रबंधन की दृष्टि से प्राप्त डीपीआर स्वीकृति के लिए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को मंजूरी के लिए भेजी जाएंगी। उन्होंने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि डीपीआर तैयार करते हुए सभी पहलुओं का ध्यान रखा जाए तथा पूर्व में आपदा की दृष्टि से संवेदनशील रह चुके क्षेत्रों के बचाव के लिए आवश्यक उपाय किए जाएं ताकि आपदा से होने वाले नुक्सान को कम किया जा सके।

कांगड़ा जिला में आपदा प्रबंधन के लिए उठाए जा रहे आवश्यक कदम:

उपायुक्त डा निपुण जिंदल ने कहा कि कांगड़ा जिला आपदा की दृष्टि से संवेदनशील जोन में है तथा इसी के दृष्टिगत आपदा प्रबंधन के लिए बेहतर कार्य योजनाएं तैयार की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि आपदा पूर्व चेतावनी यंत्र भी विभिन्न जगहों पर स्थापित किए गए हैं ताकि लोगों को आपदा से पूर्व की जानकारी मिल सके और नुक्सान से बचाव किया जा सके इसी तरह से कांगड़ा जिला में गोताखोरी का प्रशिक्षण भी जवानों को दिया जा रहा है ताकि बाढ़ इत्यादि की स्थिति में लोगों को बचाया जा सके। इस अवसर पर एडीसी सौरभ जस्सल, एडीएम रोहित राठौर तथा उपमंडलाधिकारी तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

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