सिर्फ कुत्ते के काटने से ही नहीं होती रेबीज बीमारी- डॉ. दलजीत कौर
विश्व रेबीज दिवस के अवसर पर जागरूकता शिविर आयोजित
सचिन सोनी, राज घई, कीरतपुर साहिब, डॉ. दलजीत कौर वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी कीरतपुर साहिब ने कहा कि “विश्व रेबीज दिवस” हर साल 28 सितंबर को एक वैश्विक स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रम के रूप में मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य रेबीज (हल्की) बीमारी के बारे में जागरूकता फैलाना है। यह एक खतरनाक बीमारी है जो किसी की जान भी ले सकती है। आमतौर पर लोगों का मानना है कि इस बीमारी के होने के पीछे सिर्फ कुत्ते का काटना ही कारण होता है, लेकिन ज्यादातर लोग यह नहीं जानते कि कभी-कभी कुछ अन्य जानवरों के काटने से भी रेबीज हो सकता है। उन्होंने कहा कि रेबीज वास्तव में एक बीमारी है जो रेबीज नामक वायरस से संक्रमित जानवरों के काटने से मनुष्यों में फैलती है। यह जरूरी नहीं है कि यह बीमारी सिर्फ कुत्ते के काटने से ही फैलती है। यह बिल्ली, बंदर, चमगादड़, लोमड़ी सहित कुछ अन्य जानवरों के काटने से भी हो सकता है। हालाँकि, ज्यादातर मामलों में यह बीमारी कुत्ते के काटने से होती है। रेबीज वायरस संक्रमित जानवरों की लार में पाया जाता है। जब कोई संक्रमित जानवर किसी व्यक्ति को काटता है और उसकी लार खरोंच या अन्य माध्यम से व्यक्ति की त्वचा में प्रवेश करती है, तो वायरस व्यक्ति को संक्रमित कर देता है। उन्होंने कहा कि किसी भी जानवर के काटने पर डॉक्टरी सलाह लेना बहुत जरूरी है। कई लोग गलतफहमियों के कारण भ्रमित हो जाते हैं और बीमारी से बचने की बजाय उसके चक्र में फंस जाते हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को ऐसी किसी घटना का शिकार होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर चिकित्सीय सलाह लेनी चाहिए और आवश्यकतानुसार टीका लगवाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी अस्पतालों में टीकाकरण निःशुल्क किया जाता है। खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. जंगजीत सिंह ने भी उपस्थित स्टाफ व अन्य लोगों के साथ हल्का की बीमारी के बारे में विशेष जानकारी साझा की ताकि लोग सचेत रह सकें। इस अवसर पर स्वास्थ्य निरीक्षक बलवंत राय, सिकंदर सिंह भंगल, सुनीता कुमारी, सुखदीप सिंह स्वास्थ्य निरीक्षक, राजिंदर सिंह, गुरदीप सिंह बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता, मीनाक्षी, निशा, नीलम एएनएम, दलबीर कौर, हरजीत कौर और मनप्रीत कोर स्टाफ नर्स, नर्सिंग प्रशिक्षु और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
