February 23, 2026

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव परिणामों में एनडीए की आंधी

योगी का ‘बटेंगे तो कटेंगे’ नारा रहा असरदार, आरएसएस की सक्रियता की भी बड़ी भूमिका

नई दिल्ली: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में एनडीए की आंधी देखने को मिल रही है। अगर रुझान आगे भी ऐसे ही बने रहे तो बीजेपी अकेले अपने दम पर भी सरकार बना सकती है। क्योंकि एनडीए जहां 227 सीटों पर आगे चल रहा है वहीं इसमें भाजपा अकेले अपने दम पर 131 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं। देखा जाए तो महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों और यूपी के उपचुनावों में योगी आदित्यनाथ का बंटेंगे तो कटेंगे के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक हैं तो सेफ है का नारा हिट होता दिख रहा है।

यूपी, महाराष्ट्र और झारखंड इन राज्यों में चुनाव प्रचार के दौरान योगी आदित्यनाथ का दिया नारा ‘बटेंगे तो कटेंगे’ छाया रहा। पूरे चुनाव का केंद्र बिंदु बना रहा। योगी आदित्यनाथ ने हिंदू वोटों को ध्रुवीकृत करने और विपक्ष खासकर कांग्रेस के जातिगत जनगणना के दांव की काट के लिए ये नारा उछाला था। उनका नारा चुनाव में सुपर हिट साबित होता दिख रहा है। महाराष्ट्र में ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड ने महाविकास अघाड़ी के पक्ष में वोटिंग की खुल्लमखुल्ला अपील की थी। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के मौलाना सज्जाद नोमानी ने मुस्लिमों से एमवीए के पक्ष में वोट देने की अपील की। बीजेपी ने इसे ‘वोट जिहाद’ के तौर पर प्रचारित किया। मुस्लिमों से इस तरह से किसी खास पार्टी या गठबंधन के पक्ष में वोट देने की अपीलों ने योगी आदित्यनाथ के ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ नारे की अपील बढ़ा दी। कहीं न कहीं, इससे वोटों को ध्रुवीकरण हुआ और महायुति को इसका सीधा फायदा मिला। महाराष्ट्र में महायुति की जीत का श्रेय लाडकी बहना जैसी स्कीम और अन्य फैक्टर्स के साथ-साथ योगी आदित्यनाथ के आक्रामक चुनाव प्रचार को भी निश्चित तौर पर जाएगा। माना यह भी जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में जहां आरएसएस राजनीतिक कारणों से सक्रिय नहीं रही वहीं इन चुनावों में इस संगठन ने खुलकर बीजेपी व सहयोगी दलों के लिए अंदर ही अंदर काम किया। जिसका परिणाम इस बड़ी जीत के रूप में सामने आ रहा है।

चुनाव से पहले यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की भारी मांग थी और उम्मीदवारों से लेकर सीनियर नेता भी बंटेंगे तो कटेंगे का नारा दोहरा रहे थे। एक है तो सेफ है और मोदी है तो मुमकिन है, नारे का फायदा भी महाराष्ट्र में हुआ। हरियाणा में भी योगी आदित्यनाथ ने बंटेंगे तो कटेंगे का नारा लगाया था, जिसका असर चुनावों में देखने को मिला था। लेकिन जब इन्होंने ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ वाले बैनर महाराष्ट्र में लगाए तो इसकी तीखी प्रतिक्रिया हुई क्योंकि महाराष्ट्र में इस तरीके का हिंदुत्व नहीं चलता जो उत्तर प्रदेश या हरियाणा में चला है। लेकिन अब जब चुनावी नतीजें आए तो इस नारे ने बड़े बड़े नेता पस्त कर दिए।

योगी आदित्यनाथ ने न सिर्फ ‘बटेंगे तो कटेंगे’, ‘एक हैं तो नेक हैं, एक हैं तो सेफ हैं’ के नारे पर आक्रामक प्रचार किया बल्कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के एक बयान को भी लपक लिया। खरगे ने कुछ चुनावी रैलियों में इस बात का जिक्र किया था कि कैसे जब वह छोटे थे तब उनकी मां और परिवार के कई सदस्यों को दंगे में मार डाला गया था। योगी ने अपनी रैलियों में कहा कि खरगे जी इतनी हिम्मत नहीं जुटा पा रहे कि बता सकें कि उनके परिवार वालों को हैदराबाद के निजाम के रजाकारों ने मारा था।

योगी आदित्यनाथ ने 5 नवंबर से 18 नवंबर तक 13 दिनों में धुआंधार प्रचार करते हुए महाराष्ट्र, झारखंड और उत्तर प्रदेश में 37 रैलियां की थी। इसके अलावा 2 रोड शो भी किए। महाराष्ट्र में उन्होंने महायुति के पक्ष में ताबड़तोड़ 11 रैलियां की। झारखंड में 4 दिनों के भीतर 13 रैलियां और यूपी की 9 सीटों पर उपचुनाव के लिए भी 5 दिन में 13 रैलियां और 2 रोड शो किए। महाराष्ट्र में एनडीए 227 सीटों पर आगे चल रहा है जबकि इंडी गठबंधन 54 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं। जबकि झारखंड में इंडी गठबंधन 57 सीटों पर व एनडीए 23 सीटों पर आगे चल रहा है। स्पष्ट है कि महाराष्ट्र में भाजपा गठबंधन को एक बड़ी जीत मिली है व झारखंड में इंडी गठबंधन बहुमत का आंकड़ा पार कर चुका है।

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