बच्चों के समग्र विकास में राष्ट्रीय शिक्षा नीति कारगर : डा संजय सिंह
बहादुरगढ मार्ग पर स्थित केंद्रीय विद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तीसरे वर्ष के जश्न पर कार्यक्रम आयोजित
झज्जर, आजादी अमृत महोत्सव की श्रृंखला में बहादुरगढ मार्ग पर स्थित केंद्रीय विद्यालय परिसर में संगठन की ओर से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तीन वर्ष पूरा होने के उपलक्ष्य में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय विद्यालय के प्राचार्य डॉ संजय कुमार ने एनईपी की आवश्यकता और स्कूली शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी देश के बच्चे उस देश के भविष्य के निर्माण स्तम्भ हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल एनईपी 2020 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सभी जरूरी गतिविधियों का पालन कर रहे हैं, ताकि स्कूली शिक्षा को नवीनीकरण और नवाचार के साथ बेहतर पहचान मिल सके। अगले 25 वर्षों में भारत को पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने के प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण को पूरा करने के लिए वसुदेव-कुटुंबकम और विश्व-गुरु की भावना से विद्यालय ओत-प्रोत हैं।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्कूली शिक्षा में समानता, समावेशिता और गुणवत्ता में सुधार पर जोर दिया जा रहा है। इस दृष्टि से ईसीसीई के अंतर्गत बाल वाटिका , निपुण भारत, विद्या प्रवेश, परीक्षा सुधार और कला-एकीकृत शिक्षा जैसी नवोन्मेषी शिक्षाशास्त्र जैसी पहल और बच्चों के बेहतर शिक्षण परिणामों और समग्र विकास के लिए खिलौना-आधारित शिक्षाशास्त्र को अपनाया जा रहा है।
प्राचार्य ने कहा कि सक्रिय भागीदारी के लिए और बच्चों के बारे में फीडबैक प्राप्त करने के लिए नियमित रूप से पीटीएम आयोजित की जा रही हैं। अभिभावकों को ग्रैंड पेरेंट्स डे, गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस और स्काउट्स और गाइड्स द्वारा सर्व-धर्म प्रार्थना आदि पर विद्यालय परिवार के सदस्य के रूप में स्कूल कार्यक्रमों में आमंत्रित किया जा रहा है। इस दौरान स्कूलों में नई शिक्षा नीति के उचित कार्यान्वयन और अनुवर्ती योजनाओं का अवलोकन करने के लिए प्रधानाध्यापकों और अन्य शिक्षाविदों ने विचार सांझा किए। इस अवसर पर नवोदय स्कूल के प्राचार्य राज रतन तिवारी ने भी राष्ट्रीय नीति के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।
