नगर निगम चंडीगढ़ : बहुमत के बावजूद विपक्ष में बैठेगी भाजपा
चंडीगढ़ : नगर निगम में वर्तमान में बहुमत का आंकड़ा भाजपा के पक्ष में है, लेकिन वह विपक्ष में बैठेगी। दरअसल, मेयर चुनाव के समय भाजपा के 14 पार्षद थे, जबकि एक सांसद का वोट था और आप व कांग्रेस गठबंधन के पास 20 वोट थे, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। अब भाजपा के पास कुल 18 वोट हैं सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले आप के तीन पार्षद भाजपा में शामिल हो गए हैं। ऐसे में भाजपा में पार्षदों की संख्या 17 हो गई है। सांसद को भी जोड़ दें तो भाजपा के पक्ष में 18 वोट हैं, जबकि आप-कांग्रेस के पास 17 ही पार्षद हैं। हालांकि फिर भी भाजपा के पास अविश्वास प्रस्ताव लाने का आंकड़ा नहीं है। कुलदीप कुमार को दूसरे मेयरों के मुकाबले मिलेगा कम समय आप का बेशक मेयर बन गया हो, लेकिन निगम सदन चलाने में उसे मुश्किल का सामना करना पड़ेगा। भाजपा के साथ नौ मनोनीत पार्षद भी हैं। ऐसे में आप को घेरने में भाजपा को मनोनीत पार्षदों का समर्थन मिलेगा। एक्ट के अनुसार चंडीगढ़ में मेयर का एक साल का कार्यकाल होता है, लेकिन मेयर चुनाव विवाद के कारण एक माह खराब हो गया है। ऐसे में आप के मेयर कुलदीप कुमार को दूसरे मेयरों के मुकाबले में कम समय मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने बीते कल एतहासिक फैसला सुना कर आदमी पार्टी के कुलदीप कुमार को चंडीगढ़ का नया मेयर बना दिया। जिस इलाके डड्डूमाजरा से कुलदीप कुमार ने बतौर कॉन्ट्रैक्ट सफाई कर्मचारी अपना करियर शुरू किया था, उसी इलाके से पार्षद बन कर आज निगम मेयर बन कर शहर की कमान संभालेंगे। आप की नेहा को दिया गया था मेयर उम्मीदवार बनाने का प्रलोभन सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले आप की पार्षद नेहा मुसावत, पूनम और गुरचरणजीत सिंह काला भाजपा में शामिल हो गए थे। भाजपा ने मनोज सोनकर से पहले ही मेयर पद से इस्तीफा दिलवा दिया था। ऐसा माना जा रहा था कि भाजपा की रणनीति थी कि फिर से मेयर चुनाव होने की स्थिति में नेहा को उम्मीदवार बनाया जाए, क्योंकि नेहा मनोज सोनकर से ज्यादा पढ़ी-लिखी हैं। मनोज सोनकर सिर्फ सातवीं तक पढ़े थे। वाल्मीकि समुदाय के वोट पर थी भाजपा की नजर नेहा वाल्मीकि समुदाय से संबंध रखती हैं। वाल्मीकि समुदाय का शहर में सवा लाख से ज्यादा वोट बैंक है। भाजपा नेहा को उम्मीदवार बनाकर लोकसभा चुनाव में इस वोट बैंक को अपनी तरफ खींचना चाहती थी, लेकिन उनकी सारी रणनीति धरी की धरी रह गई।
