कश्मीरी शॉल पर जीएसटी बढ़ाने के प्रस्ताव पर भड़कीं महबूबा मुफ्ती
श्रीनगर: रेडीमेड कपड़ों समेत कश्मीरी शॉल जीएसटी बढ़ाने के प्रस्ताव पर जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती भड़क गईं। संवाददाताओं से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि कश्मीरी शॉल पर जीएसटी बढ़ाने के बाद राज्य का यह हस्तशिल्प उद्योग पूरी तरह खत्म हो जाएगा। महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से इस मुद्दे पर ध्यान देने की अपील की।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती का यह बयान तब सामने आया है, जब शनिवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में राजस्थान के जैसलमेर में जीएसटी परिषद की 55वीं बैठक में कश्मीरी शॉल समेत रेडीमेड कपड़ों पर जीएसटी बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया। जीएसटी दरों को तय करने के लिए गठित मंत्री समूह ने रेडीमेड कपड़ों पर टैक्स रेट को उचित बनाने का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही मंत्री समूह ने 1,500 रुपये तक की लागत वाले रेडीमेड कपड़ों पर 5 प्रतिशत जीएसटी और 1,500 रुपये से 10,000 रुपये तक की लागत वाले कपड़ों पर 18 प्रतिशत जीएसट का प्रस्ताव रखा है। 10,000 रुपये से अधिक कीमत वाले कपड़ों पर 28 प्रतिशत कर लगेगा।
महबूबा मुफ्ती ने आरोप लगाया है कि कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर के लोगों को पूरी तरह टूरिज्म पर निर्भर बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि कश्मीरी शॉल हमारे लिए सिर्फ आजीविका का साधन नहीं है, बल्कि जम्मू-कश्मीर की पहचान है। यह पूरी दुनिया में मशहूर है। नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार ने शाहतूश पर प्रतिबंध लगा दिया, जो हमारी विरासत थी। इससे आर्थिक नुकसान भी हुआ।
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि आज जब आप कश्मीरी शॉल पर जीएसटी बढ़ाकर 28 उ कर देंगे, तो हमारी कला अपने आप खत्म हो जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि बागवानी वाली जमीन पर विकास कार्य करके और हस्तशिल्प क्षेत्र पर जीएसटी लगाकर जम्मू-कश्मीर को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि इनकी वजह से जम्मू-कश्मीर अपने कठिन समय में बचा रहा। मैं उमर अब्दुल्ला से अनुरोध करती हूं कि ये हमारी संपत्ति हैं। आपके पास 50 विधायक हैं, 3 सांसद हैं और भगवान के लिए हमें बताएं कि आप हमारी संपत्ति को बचाने के लिए क्या कर रहे हैं? जीएसटी को 28 प्रतिशत करने के मुद्दे पर आप क्या कर रहे हैं।
पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने अपने आरोप कहा कि अगर हमारी बागवानी और हस्तशिल्प खत्म हो गए, तो हम केवल पर्यटन पर निर्भर रहेंगे। शायद, केंद्र सरकार बागवानी और हस्तशिल्प क्षेत्रों को खत्म करना चाहती है, ताकि जम्मू-कश्मीर के लोग केवल पर्यटन पर निर्भर रहें और वे जब चाहें पर्यटकों को यहां भेज सकें।
