February 25, 2026

मणिपुर घटना- स्वार्थी राजनीति का कटु सत्य

दुनिया में लोग स्वयं को कितना भी आधुनिक, सामाजिक व नवीन तकनीक से परिपूर्ण घोषित करते रहें लेकिन उनकी मानसिकता में पाषाण युग की संवेदनाएं ज्यों की त्यों बरकरार है। अमेरिका जैसे विकसित देशों में आज भी नस्ली भेदभाव की मानसिकता के साथ हिंसक कृत्य की घटनाएं सामने आती रहती है। भारत में भी इस तरह के घटनाक्रम अक्सर देखने को मिलते हैं जहां धार्मिक, जातीय कट्टरता आधारित हिंसा का प्रदर्शन किया जाता है। संविधान या कानून इसे लेकर कितना भी सख्त क्यों न हो जाए, लेकिन मानसिकता आज भी वही है जो कानून का राज स्थापित होने से पहले या हजारों साल पूर्व थी। हाल ही में मणिपुर में यौन हिंसा को लेकर जो कुछ सामने आया है वह इंसानियत को शर्मसार करने वाला है। महिला उत्पीड़न की ऐसी ही घटनाएं बंगाल व राजस्थान में भी सामने आई है। मणिपुर उच्च न्यायालय की ओर से राज्य के मैती समुदाय को जनजाति का दर्जा देने पर विचार करने के आदेश के बाद कुकी और मैती समुदाय के बीच टकराव शुरू हो गए व शांति सद्भाव पूरी तरह भंग हो गया। न्यायालय का यह निर्णय आने के बाद मई के पहले सप्ताह में ही मणिपुर में हिंसा भड़क उठी थी। यह हिंसा दो माह बीत जाने के बाद भी पूरी तौर पर नहीं रुक सकी है। इस दौरान कुकी और मैती दोनों ने एक दूसरे पर हमले किए तथा एक दूसरे के घर लुटे, जलाए और हत्याएं की। इस दौरान पुलिस के हथियार भी लूटे गए जिनका इस्तेमाल हिंसा फैलाने में किया गया। दोनों ही पक्ष एक दूसरे पर अत्याचार करने में किसी तरह भी पीछे नहीं रहे। इसके फलस्वरूप हजारों लोगों को पलायन करना पड़ा। अनेकों महिलाओं के साथ यौन हिंसा के मामले भी सामने आए। मणिपुर में चल रहे इन घटनाक्रमों से केंद्र व प्रदेश सरकार की नाकामी तो सामने आ ही रही है लेकिन विपक्षी दलों द्वारा इस पर की जा रही राजनीति भी शर्मनाक है। राजनीति के इस भयानक चेहरे के कारण महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर लगाम नहीं लग पा रहा है। मणिपुर की घटना कहीं अधिक डरावनी और विचलित करने वाली है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि देश के अन्य हिस्सों में महिलाओं के साथ यौन हिंसा और उत्पीड़न की शर्मनाक घटनाएं नहीं घट रही है। बीते दिनों बंगाल के मालदा में दो महिलाओं के कपड़े फाड़कर अर्धनग्न अवस्था में उनकी सार्वजनिक रूप से पिटाई की गई थी। बंगाल में राजनीतिक कारणों से भी महिलाओं के साथ इस तरह की घटनाएं होती रहती है जैसी कि मणिपुर में देखने को मिली है। निश्चित रूप से महिला विरोधी अपराधों के मामले में बात किसी राज्य विशेष की नहीं है बल्कि देश के हर हिस्से में उनके साथ अत्याचार होता रहता है। कई बार तो ऐसी घटनाएं हो जाती है जिनके कारण देश को दुनिया भर के सामने शर्मसार होना पड़ता है। लेकिन राजनीतिक दल, तथाकथित बुद्धिजीवी और यहां तक कि देश-विदेश के मीडिया का एक हिस्सा यह देखकर अपना आक्रोश व्यक्त करते है कि घटना किस राजनीतिक दल के शासन में हुई है? यह कहना अनुचित नहीं होगा कि इस तरह की घटनाओं के पीछे स्वार्थी राजनीति की अधिक भूमिका रहती है। राजनीतिक दल एक दूसरे को नीचा दिखाने या अपने वोट बैंक को बनाए रखने के लिए ऐसी घटनाओं को हवा देते हैं। ऐसे मुद्दों को उठाते हैं जिन से समाज में नफरत का माहौल बने। भीड़ को भड़काने में किसी न किसी राजनीतिक दल या संगठन का हमेशा हाथ होता है। अगर सभी राजनीतिक दल देश, समाज हित को ध्यान में रखकर कार्य करें तो ऐसी घटनाएं होना संभव नहीं है। – पीयूष सिंगला

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