मणिपुर घटना से दहला देश का मन
भारत के सभ्य समाज में नारी को बड़े सम्मान के साथ देखा जाता है भारत के कई हिस्सों में कन्या रूप में नारी की पूजा भी की जाती है। हमारे पूर्वजों ने नारी को सर्वोच्च स्थान दिया गया है, क्योंकि हर इंसान नारी से ही पैदा हुआ है। दुनिया का बड़े से बड़ा ताकतवर इंसान भी नारी से ही पैदा हुआ है। पुरुष प्रधान समाज में हर पुरुष किसी ना किसी रिश्ते के साथ नारी से जुड़ा हुआ है, वह बहन भाभी, बेटी, पत्नी, बुआ, मासी, मामी, चाची, ताई, अन्य कोई भी रिश्ता हो। अगर एक पल के लिए मान भी लिया जाए कि पुरुष इन सब में से किसी भी रिश्ते से नारी के साथ नहीं जुड़ा है, तो कम से कम मां तो हर पुरुष से जुड़ा हुआ नारी रूप रिश्ता है। भारत में हर धर्म के धार्मिक ग्रंथ भी नारी के साथ मर्यादा में रहना सिखाते हैं। पर फिर भी देश में ऐसी घटनाएं हो रही है जो शर्मसार कर जाती है। पिछले दिनों भारत के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर की राजधानी इंफाल से 35 किलोमीटर दूर कांगपोकपी जिले में 2 महिलाओं के साथ अमानवीय घटना ने मन को विचलित कर दिया। यहां पर पुरुषों की भीड़ में दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाया गया। और बाद में उनके साथ क्रूर व्यवहार किया गया। इस अमानवीय घटना ने पूरी मानवता को शर्मसार कर दिया। यह उन लोगों की मानसिकता की गिरावट को दर्शाता है। क्या वह लोग आसमान से टपके थे? जिन्होंने नारी के साथ यह दुर्व्यवहार किया अगर एक बार भी यह बात सोच लेते कि उन को जन्म देने वाली भी एक नारी ही थी, तो शायद यह घटना न घटी होती। देश कभी भी ऐसे लोगों को माफ नहीं कर सकता जिन लोगों की वजह से पूरी मानवता का सर, शर्म से झुक गया। मणिपुर घटना से देश का मन दहल चुका है, इसीलिए राज्य सरकार, केंद्र सरकार, एवं देश की न्याय व्यवस्था से आग्रह है, नारी के प्रति ऐसी क्रूर घटना को अंजाम देने वाले दोषियों को भी क्रूर सजा ही देनी चाहिए, और यह सजा सिर्फ और सिर्फ फांसी है, दोषियों को सरकार सिर्फ जेल तक सीमित न रखें उन्हें जल्द से जल्द फांसी दे।
-कपिल मंहिदली
