कोरोना महामारी के बाद भी खत्म नहीं हो रहे मरीजों पर इसके दुष्प्रभाव
नई दिल्ली: कोरोना वायरस महामारी भले ही अपने चरम पर न हो, लेकिन इसके दुष्प्रभाव अब भी लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहे हैं। कोरोना संक्रमण के बाद ठीक होने वाले कई लोगों को लॉन्ग कोविड नामक एक नई बीमारी का सामना करना पड़ रहा है। इस बीमारी में कोरोना संक्रमण के लक्षण लंबे समय तक बने रहते हैं या नए लक्षण उभर आते हैं।
लॉन्ग कोविड में मरीजों को थकान, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, जोड़ों का दर्द, मांसपेशियों में दर्द, ब्रेन फॉग और एकाग्रता में कठिनाई जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ मरीजों को न्यूरोलॉजिकल समस्याएं जैसे कि स्मरण शक्ति कमजोर होना और अवसाद भी हो सकता है। लॉन्ग कोविड का कोई विशिष्ट इलाज अभी तक नहीं खोजा जा सका है। डॉक्टरों को इस बीमारी का निदान करने में भी मुश्किल हो रही है क्योंकि इसके लिए कोई विशिष्ट परीक्षण नहीं है। डॉक्टर आमतौर पर मरीज के लक्षणों के आधार पर ही इलाज करते हैं।
भारत में भी लॉन्ग कोविड के मरीजों की संख्या काफी अधिक है। एक अध्ययन के अनुसार, भारत में ठीक होने वाले 45 प्रतिशत कोरोना मरीजों को लॉन्ग कोविड के लक्षणों का सामना करना पड़ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हालांकि कोविड-19 को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल से हटा दिया है, लेकिन लॉन्ग कोविड के कारण कई देशों में स्वास्थ्य प्रणाली पर दबाव बना हुआ है।
शोधकर्ताओं ने पाया है कि कोरोना संक्रमण के कारण मस्तिष्क की कोशिकाओं में सूजन हो सकती है, जिससे लॉन्ग कोविड के लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं। लॉन्ग कोविड एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है जिसके लिए वैज्ञानिक और चिकित्सक अभी भी समाधान खोज रहे हैं। इस बीच, लॉन्ग कोविड से पीड़ित मरीजों को डॉक्टरों की सलाह का पालन करना चाहिए और स्वस्थ जीवनशैली अपनानी चाहिए।
