आपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने बनाया दुर्लभ रिकॉर्ड
300 कि. मि. दूर से मार गिराया था पाकिस्तान का हवाई प्लेटफॉर्म
नई दिल्ली, ऑपरेशन सिंदूर के तीन महीने बाद भारतीय वायुसेना ने पहली बार उस बड़े हवाई हमले का खुलासा किया है, जिसे सैन्य विशेषज्ञ आधुनिक हवाई युद्ध के इतिहास में अभूतपूर्व मानते हैं। शनिवार को बेंगलुरु में एक व्याख्यान के दौरान वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने बताया कि 7 मई को पाकिस्तान का एक बड़ा हवाई प्लेटफॉर्म लगभग 300 किलोमीटर की दूरी से मार गिराया गया। यह संभवतः इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस या एयरबॉर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल विमान था।
वायुसेना प्रमुख ने इसे अब तक की सबसे लंबी दूरी से दर्ज सतह-से-आकाश मारक कार्रवाई बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह रिकॉर्ड विमान के आकार नहीं, बल्कि दूरी के लिहाज से है। चूंकि मलबा दुश्मन की सीमा में गिरा, ऐसे मामलों की स्वतंत्र पुष्टि कठिन होती है, लेकिन इस घटना की पुष्टि इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग से की गई। अधिकारियों के अनुसार, रडार पर लक्ष्य का ब्लिप दिखा और फिर गायब हो गया, जिससे पुष्टि हुई कि वह मार गिराया गया।
300 किमी की दूरी से हवाई लक्ष्य को गिराने के लिए लंबी दूरी की इंटरसेप्टर मिसाइल, सटीक ट्रैकिंग, स्थिर टार्गेट लॉक और निरंतर मार्गदर्शन क्षमता की आवश्यकता होती है। यह क्षमता भारतीय वायुसेना ने हाल ही में रूसी एस-400 प्रणाली के आने के बाद हासिल की है। इस प्रणाली की 400 किमी तक की मारक क्षमता ने पाकिस्तानी विमानों को इतनी दूरी पर रोक दिया कि वे लंबी दूरी के ग्लाइड बम का भी इस्तेमाल नहीं कर सके।
इतनी दूरी से सतह-से-आकाश हमले के उदाहरण बेहद कम हैं। फरवरी 2024 में यूक्रेन ने दावा किया था कि उसने रूस के ए-50 जासूसी विमान को 200 किमी से अधिक दूरी पर गिराया, जबकि फरवरी 2022 में यूक्रेन का एक एसयू-27 लड़ाकू विमान रूसी एस-400 से लगभग 150 किमी की दूरी पर गिरा। 300 किमी की दूरी से इस तरह का हमला सार्वजनिक रूप से दर्ज होना अत्यंत दुर्लभ है।
