राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल चायल में “ब्रेवहार्ट्स मेमोरियल” का उद्घाटन
स्कूल में पांच पूर्व छात्रों की प्रतिमाओं का अनावरण किया जिनको शहादत बाद मिले हैं उच्च सैन्य सम्मान
सोलन, कमल जीत: रक्षा मंत्रालय के संचालित और 1925 में स्थापित राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल, चायल ने अपनी शताब्दीवर्ष के कार्यक्रमों के तहत विद्यालय के पराक्रमी योद्धाओं की याद में “ब्रेवहार्ट्स मेमोरियल” का अनावरण पंजाब हरियाणा एवं हिमाचल प्रदेश स्वतंत्र के सब एरिया कमांडर एवं विद्यालय के लोकल बोर्ड ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन के चेयरमैन मेजर जनरल जे एस मांगट, विशिष्ट सेवा मेडल के सानिध्य में वीर सपूतों के परिजनों ने किया। जिनमें कर्नल कंवर जयदीप सिंह के चाचा ब्रिगेडियर बी एस कंवर,लेफ्टिनेंट कमांडर श्वेत गुप्ता के माता वीना गुप्ता एवं बहन श्वेता गुप्ता,कैप्टन अंशुमन सिंह के पिता सूबेदार मेजर रवि प्रताप सिंह एवं माता मंजूसिंह शामिल थे। मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में कहा कि यह स्मारक देश की सेवा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले विद्यालय के प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों को समर्पित भावपूर्ण श्रद्धांजलि है। इस आयोजन में वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, विशिष्ट अतिथि, कैडेट्स और वीरों के परिवारों ने भाग लिया एवं इसे विद्यालय के इतिहास में वीरता, देशभक्ति और बलिदान की परंपरा मे अविस्मरणीय क्षण के रूप में अंकित किया जाएगा।साथ ही मुख्यातिथि ने पूर्व छात्रों की प्रतिबद्धता एवं उनके साहस की सराहना करते हुए कहा कि इन वीर योद्धाओं की दिखाई गई वीरता भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा स्रोत बनी रहेगी। उन्होंने कैडेट्स को सम्मान, ईमानदारी और सेवा के मूल्यों को अपनाने का आव्हान किया राष्ट्रीय मिलिट्री विद्यालय के पांच पूर्व छात्र, जिन्होंने अपनी वीरता और बलिदान से देश के इतिहास पर अमिट छाप बनाई। इनके बलिदान की याद में ब्रेव हार्ट्स मेमोरियल बनाया गया है।
स्कूल प्रधानाचार्य गंगवाल ने बताया की इस स्कूल की आधारशीला 25 फ़रवरी 1922 को आज ही के दिन हुई थी। यह स्कूल जालंधर में 1925 से कार्यशील हुआ। स्कूल ने शताब्दी में देश को सैन्य और सामाजिक क्षेत्र में उच्च स्थानों पर पहुंची असंख्य विभूतियों को दिया हैं । स्कूल के कैडिट जिन्हे सैन्य क्षेत्र में सर्वोच्च और उच्च सैन्य सम्मान मिले हैं हमारा स्कूल ऐसे सम्मान प्राप्त करने वाले इन योद्धाओं पर नाज करता हैं जिन्होंने देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। इन योद्धाओं की प्रतिमाओं का आज अनावरण किया जा रहा हैं उनमे इस स्कूल के पूर्व छात्र कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया, परमवीर चक्र मरणोपरांत स्कूल कैडेट 1464, रॉलिंसन सदन शिक्षा अवधि अगस्त 1947 – 12 जनवरी 1953 तक वह 3/1 गोरखा राइफल्स के साथ तैनात थे, ने 1961 में कांगो देश में हिंसक विद्रोहियों के बीच छोटी सैन्य टुकड़ी लेकर घुसे और खुखरी के हमले से 40 विद्रोहियों को मार डाला। गले में गोली लगने से शहादत मिली पर सयुक्त राष्ट्र की शान्ति सेना को विजय दिलाई। उन्हें परमवीर चक्र मरणोपरांत से सम्मानित किया गया। यह किसी यूएन ऑपरेशन में प्राप्त
किया गया एकमात्र ऐसा पुरस्कार है।
सेकैंड लेफ्टिनेंट सुरेंद्र पाल सिंह सेखों, वीर चक्र मरणोपरांत स्कूल कैडेट क्रमांक-12, शिवाजी सदन में 1952 से 58 तक शिक्षरत रहे।
1965 के युद्ध के दौरान, सेकंड लेफ्टिनेंट सेखों ने डेरा बाबा नानक के निकट रावीनदी पर बने
पुल पर भारत द्वारा कब्जा कर लिए जाने के बाद, उस स्थान पर अत्यधिक गोलाबारी की गई, जिसके परिणामस्वरूप कुछ लोग घायल हो गए। गोलाबारी के दौरान सेकैंड लेफ्टिनेंट सेखों ने अपनी कंपनी के घायल सैनिकों की मदद की और उनकी मरहम-पट्टी की। एक घायल सैनिक की मरहम-पट्टी करते समय सेकैंड लेफ्टिनेंट सेखों की दुश्मन की गोली लगने से शहीद हो गए।
उनके अदम्य साहस को देखते हुए वीर चक्र मरणोपरांत से सम्मानित किया गया। कर्नल कंवर जयदीप सिंह शौर्य चक्र (बार), सेना मेडल स्कूल कैडेट 906, तक्षशिला सदन 1968 से 69 तक शिक्षरत रहे वह 6 डोगरा के कमांडिंग अफसर थे।
उन्होंने 2002 में राजौरी में आतंकवादियों से घिरे हुए अपने समूह सुरक्षा सुनिश्चित की। उन्होंने अपनी गर्दन में घातक चोट के बावजूद दो आतंकवादियों को मार गिराया। उनके अद्वितीय साहस के लिए उन्हें शौर्य चक्र (बार) मरणोपरांत,से नवाजा गया। लेफ्टिनेंट कमांडर श्वेत गुप्ता, नौसेना मेडल मरणोपरांत स्कूल कैडेट 2263, नालंदा सदन स्कूल में 1989 से 96 तक शिक्षरत रहे 2008 में आईएनएस पनडुबी में तैनात लेफ्टिनेंट कमांडर गुप्ता ने जहरीली गैस विस्फोट के बाद तीन नाविकों को बचाने के लिए एक गैस भरे हुए कमरे में साहसिक रूप से प्रवेश किया। वह जहरीली गैस से प्रभावित हो गए और नौ दिनों तक संघर्ष करने के बाद शहीद हो गए। उनकी वीरता को मरणोपरांत नौ सेना पदक से सम्मानित किया गया। कैप्टन अंशुमन सिंह, कीर्ति चक्र मरणोपरांत स्कूल कैडेट 3585, उज्जैन सदन स्कूल में 2008 से 15 तक शिक्षरत रहे वह 19 जुलाई 2023 जब सियाचिन ग्लेशियर में तैनात भारतीय सेना के टेंट में शार्ट सर्किट के कारण आग लग गयी थी। इस आग की चपेट में कई टेंट आ गए थे। अपनी जान की परवाह किये बिना अपने साथी सैनिकों की जान बचाई। आग पर काबू पाने की कोशिश में रेजिमेंटल मेडिकल ऑफिसर कैप्टन अंशुमन सिंह शहीद हो गए थे। उन्हें उनकी निस्वार्थ बहादुरी के लिए कीर्ति चक्र मरणोपरांत से सम्मानित किया गया।
