February 14, 2026

पटड़ीघाट में सहकारी सभा ने 30 बीघा बंजर भूमि पर लगाया एक मैगावाट का सोलर प्रोजैक्ट, प्रतिमाह 5 लाख की आमदनी

सफलता की कहानीः सरकाघाट, 02 फरवरी, 2025

जिला मण्डी के सरकाघाट उपमंडल की ग्राम पंचायत पटड़ीघाट में स्थित “दि बताहुता एग्रीकल्चर सर्विस को-ओपरेटिव सोसायटी लिमिटेड पटड़ीघाट” ने सरकार की सौर उर्जा नीति के तहत अक्षय उर्जा पर आधारित प्रोजेक्ट स्थापित कर 4 से 5 लाख रुपए प्रतिमाह आमदनी का नया जरिया बनाया है। सोसायटी ने 30 बीघा जमीन पट्टे पर लेकर एक मैगावाट क्षमता का सौर उर्जा प्लांट स्थापित किया है।

सोसायटी के सचिव पिताम्बर लाल ने बताया कि उनके मन में हमेशा ग्रामीण क्षेत्र में कुछ नया करने का सपना था। क्षेत्र में सिंचाई सुविधा न होने के कारण खेती के लिए बारिश पर ही निर्भर रहना पड़ता है। जिस कारण ग्रीन हाऊस, डेयरी फार्म आदि कार्य यहां कठिन थे। साथ ही पंचायत शहर से दूर होने से कोल्ड स्टोर, फसल ग्रेडिंग सिस्टम, आटा मिल आदि कार्यों में आयात-निर्यात, मार्केटिंग व बिक्री की समस्या थी। उन्होंने ऐसा कार्य करने का सोचा जो इस क्षेत्र में बिना दिक्कत के स्थापित हो सके। ऐसे में सोलर प्लांट का प्रस्ताव प्रबंधन समिति के सामने रखा।

पितांबर लाल ने बताया कि अगस्त, 2023 में हिम उर्जा विभाग से सोसायटी को प्लांट आवंटित हुआ। इसके उपरांत लगभग नौ माह में ही इसका कार्य पूरा कर लिया गया तथा मार्च, 2024 में पटड़ीघाट के गुलेला, हड़सर में एक मैगावॉट का “सहकारी सभा सोलर पॉवर प्रोजैक्ट” स्थापित किया। उन्होंने बताया कि संयंत्र स्थापित करने पर लगभग 5 करोड़ रुपए की लागत आई है। इसके लिए उन्होंने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया सुंदरनगर से 2 करोड़ 70 लाख रूपए का ऋण लिया, बाकि 2 करोड़ 30 लाख रुपए सोसायटी से संयंत्र में निवेश किया।

उन्होंने बताया कि प्लांट से उत्पादित विद्युत की वर्तमान में 3.75 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिक्री की जा रही है। इसके लिए हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड के साथ सोसायटी ने 25 वर्ष के लिए बिजली खरीद का अनुबंध किया है। उन्होंने बताया कि उत्पादित बिजली की बिक्री से प्रतिमाह लगभग 4 से 5 लाख रुपए की आमदनी हो रही है। प्लांट में गर्मियों में कुल उत्पादन 90 से 95 प्रतिशत जबकि सर्दियों में 70 प्रतिशत तक रहता है। इस प्लांट से सोसायटी को कुल 50 से 55 लाख रूपये प्रतिवर्ष आमदनी का अनुमान है। प्रोजेक्ट की लागत दस से बारह वर्षों के भीतर पूरा कर लेने के बाद आमदनी और शुद्ध मुनाफे में बढ़ोतरी निश्चित है।

इस प्लांट के माध्यम से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तौर पर युवाओं को रोजगार भी मिला है। उन्होंने बताया कि पावर प्लांट की देखरेख के लिए सोलर बाड़बंदी, सीसीटीवी कैमरा व वॉसिंग व क्लीनिंग सिस्टम का कार्य भी हो रहा है। साथ ही सोसायटी एक इलेक्ट्रिशियन और 1 चौकीदार की नियुक्ति भी कर रही है।

पितांबर कहते हैं कि सोलर प्लांट स्थापित करने के लिए उन्होंने गुलेला, हड़सर के सेवानिवृत अध्यापक दिला राम से उनकी खाली पड़ी 30 बीघा भूमि लीज पर लेने के लिए सम्पर्क किया। इस भूमि पर बेसहारा पशुओं तथा जंगली जानवरों के कारण खेती करना घाटे का सौदा था। भूमि 30 सालों के लिए लीज पर देने की ऐवज में दिलाराम को भी प्रतिवर्ष लगभग डेढ़ लाख रूपये की आमदनी हो रही है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा हरित क्रांति के तहत सौर उर्जा के उपयोग को और अधिक बढ़ाने का निर्णय सराहनीय है। युवाओं के लिए भी सौर उर्जा प्रोजेक्ट आत्मनिर्भरता की राह खोल रहे हैं।

उपायुक्त अपूर्व देवगन ने कहा कि सरकार की सोलर पॉलिसी के तहत जिला मण्डी में सौर उर्जा प्लांट स्थापित करने के लिए लोगों को प्रेरित किया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि सौर उर्जा प्लांट स्थापित करने के इच्छुक लोगों का सकारात्मक सहयोग सुनिश्चित करें।

वरिष्ठ अधिशाषी अभियंता विद्युत विभाग, सरकाघाट राज कुमार गुप्ता ने बताया कि उपमण्डल में 6 सौर ऊर्जा संयंत्र जन्धरू कलाँ, लोअर घट्टा, सुलपुर बही बजरायाणा, सुलपुर बही, अप्पर भाम्बला, गुलैला हड़सर व मसेरन भद्रवाड़ में स्थापित किए जा चुके हैं। इनसे उत्पादित बिजली सरकार 3.75 रू प्रति यूनिट की दर पर खरीद कर रही है।

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