सतलुज में अवैध डी-सिल्टिंग नहीं रुकी तो होगा बड़ा आंदोलन: राणा केपी सिंह
बोले, एनजीटी के आदेशों की खुलेआम अवहेलना की जा रही
शिवांकुर शर्मा, नंगल: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के स्पष्ट आदेशों के बावजूद श्री आनंदपुर साहिब विधानसभा क्षेत्र में कथित कमर्शियल डी-सिल्टिंग का धंधा लगातार जारी है, जिससे क्षेत्र में रोष बढ़ता जा रहा है। पूर्व स्पीकर राणा केपी सिंह ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि शनिवार शाम तक सतलुज नदी में अवैध डी-सिल्टिंग बंद नहीं हुई तो कांग्रेस पार्टी सोमवार सुबह 10 बजे तहसील परिसर श्री आनंदपुर साहिब में जोरदार प्रदर्शन करेगी।
शुक्रवार को प्रेस वार्ता के दौरान राणा केपी सिंह ने कहा कि एनजीटी के आदेशों की खुलेआम अवहेलना की जा रही है, जो कानून के प्रति सीधी चुनौती है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी सरकार ने माइनिंग से हर साल 20000 करोड़ रुपए राजस्व जुटाने का दावा किया था, लेकिन मौजूदा हालात यह दर्शाते हैं कि यह पैसा सरकारी खजाने में जाने की बजाय कथित तौर पर कुछ लोगों की जेब में जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रतिदिन करीब 5000 टिप्पर अवैध कमर्शियल डी-सिल्टिंग में लगे हुए हैं व भारतगढ़ से लेकर खेड़ा कलमोट तक की खड्डों में रोजाना करीब एक करोड़ रुपए का अवैध कारोबार हो रहा है। इसके साथ ही प्रत्येक टिप्पर से 3000 से 5000 रुपए तक की तथाकथित ‘गुंडा पर्ची’ वसूली जा रही है, जो क्षेत्र में सक्रिय अवैध नेटवर्क को दर्शाती है।
राणा केपी सिंह ने कहा कि जिन दो खड्डों को आधिकारिक रूप से नीलाम किया गया है, वहां खनन सामग्री उपलब्ध नहीं है, लेकिन उनकी आड़ में करीब डेढ़ सौ स्थानों पर बड़े पैमाने पर कमर्शियल डी-सिल्टिंग की जा रही है। उन्होंने बताया कि एनजीटी के आदेश आते ही उन्होंने पंजाब सरकार के सिंचाई सचिव कृष्ण कुमार व जिला प्रशासन रूपनगर को इस संबंध में अवगत करवा दिया है व तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से डी-सिल्टिंग बंद करने का आश्वासन जरूर दिया गया है, लेकिन यदि यह अवैध कारोबार नहीं रुका तो कांग्रेस पार्टी न केवल श्री आनंदपुर साहिब में एसडीएम परिसर में प्रदर्शन करेगी, बल्कि मौके पर पहुंचकर डी-सिल्टिंग को रुकवाने के लिए सीधे कदम भी उठाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि माइनिंग माफिया बिना किसी रोक-टोक के काम कर रहा है व सरकार को भारी राजस्व नुकसान पहुंचा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान हर साल माइनिंग से करीब 350 करोड़ रुपए का राजस्व सरकारी खजाने में जमा होता था, जबकि वर्तमान सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि अब माइनिंग से कितना राजस्व प्राप्त हो रहा है।
