February 24, 2026

राज्य की सुरक्षा के लिए बाहरी लोगों की पहचान जरूरी: प्रतिभा सिंह

शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार के मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने पिछले दिनों घोषणा की थी कि प्रदेश में रेहड़ी-पटरी पर दुकान लगाने वाले लोगों, विशेषकर खाद्य पदार्थ बेचने वालों के लिए दुकान पर पहचान पत्र प्रदर्शित करने को अनिवार्य किया जाएगा। विक्रमादित्य की इस घोषणा को लेकर कांग्रेस के भीतर विवाद खड़ा हो गया। कांग्रेस हाईकमान ने मंत्री विक्रमादित्य को तलब कर भविष्य में सीमा रेखा पार न करने की चेतावनी दे दी। चेतावनी मिलने के बाद लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि उन्होंने विचारधारा से संबंधित कांग्रेस नेतृत्व की चिंताओं को स्वीकारा है और यह विश्वास दिलाया है कि वह पार्टी के समर्पित सिपाही हैं तथा कभी भी पार्टी लाईन से अलग बात नहीं करेंगे। विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में विधानसभा अध्यक्ष द्वारा गठित बहुदलीय समिति तीन अक्तूबर को रेहड़ी-पटरी से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा करेगी। उन्होंने कहा कि जमीन पर कोई विवाद नहीं था और यह सब मीडिया द्वारा पैदा किया गया मुद्दा है और इसे बढ़ा- चढ़ाकर पेश किया गया था। सिंह ने कहा, मैंने वेणुगोपाल जी को वास्तविक स्थिति से अवगत कराया और विचारधारा के बारे में उनकी चिंताओं को स्वीकारा। साथ ही, मैंने उन्हें यह भी बताया कि पिछले डेढ़ महीने से हिमाचल में मस्जिद मुद्दा और अन्य विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं।

साथ ही उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के आलोक में भी शहरी आजीविका पर 2016 का कानून बना हुआ है, उसके क्रियान्वयन की बात है। इसका क्रियान्वयन चरणबद्ध तरीके से होना है।

मंत्री ने बताया कि उन्होंने वेणुगोपाल से कहा कि राज्य सरकार को आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ अच्छा वातावरण भी बनाए रखना होगा। उनका कहना था- कोई भी व्यक्ति कहीं से भी राज्य में आ सकता है। हिमाचल भारत का एक अभिन्न हिस्सा है, कोई भी हिमाचली किसी भी अन्य राज्य में जा सकता है और इसी तरह कोई भी वहां आ सकता है। लेकिन रेहड़ी-पटरी पर जो कारोबार हो रहा है, उसे लेकर नियमों के अनुसार पहचान और सत्यापन किया जाना है। इसके लिए उच्च न्यायालय के निर्देश हैं। विक्रेताओं का पंजीकरण इस प्रकार किया जाना है ताकि यदि कोई अप्रिय गतिविधि हो जाए, कोई कानून और व्यवस्था की स्थिति है या स्थानीय चिंताएं पैदा हों, तो अधिकारियों के पास रिकार्ड होना चाहिए।

हिमाचल प्रदेश कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने विक्रमादित्य के समर्थन में कहा है कि राज्य की सुरक्षा के लिए बाहरी लोगों की पहचान आवश्यक है। धरातल का सत्य भी यही है कि हिमाचल प्रदेश में अवैध रूप से ठहर रहे या बस रहे लोगों की पहचान अगर नहीं करवाई जाती तो निकट भविष्य देवभूमि हिमाचल के रहने वालों को एक नहीं कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। संजौली की मस्जिद में अवैध रूप से रह रहे लोगों का स्थानीय लोगों के साथ जिस तरह का व्यवहार था जिस तरह की हरकतें करते थे और स्थानीय महिलाओं के प्रति उनके जो विचार थे उनको देखते हुए मंत्री विक्रमादित्य की घोषणा जनहित में ही थी। लेकिन प्रदेश कांग्रेस की गुटबंदी और कांग्रेस हाईकमान की तुष्टिकरण की नीति के कारण एक जनहित घोषणा राजनीति का शिकार हो गई है।

गौरतलब है कि राजधानी शिमला के उपनगर संजौली के मस्जिद में हुए अवैध निर्माण के बाद से हिमाचल में माहौल लगातार तनावपूर्ण बना हुआ है। प्रदेश भर में विभिन्न हिन्दू संगठन मस्जिद के विवादित अवैध निर्माण को गिराए जाने की मांग उठा रहे हैं। इसी कड़ी में शनिवार को शिमला सहित प्रदेश के हर जिले में प्रदर्शन किए गए। शिमला के डीसी आफिस के बाद हिन्दू संगठनों ने नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में भारत सरकार से वक्फ बोर्ड को समाप्त करना, हिमाचल में बन रही अवैध मस्जिदों व मजारों के निर्माण पर रोक लगाना आदि मांगें शामिल हैं। इसको लेकर डीसी को ज्ञापन भी सौंपा गया। देवभूमि संघर्ष समिति ने वाम दलों के शिमला फॉर पीस एंड हार्मनी बैनर तले आयोजित किए जा रहे शांति व सद्भावना मार्च पर सवाल उठाए। देवभूमि संघर्ष समिति प्रवासियों के पंजीकरण व अवैध मस्जिदों के निर्माण का मुद्दा उठा रही है।

देवभूमि संघर्ष समिति के संयोजक भरत भूषण ने कहा कि विवादित ढांचे का कानूनपूर्ण हल होना चाहिए, इस पर सरकार व प्रशासन दोहरा रुख न अपनाएं। उन्होंने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संजौली में आने के लिए आवाह्न करने पर मामला दर्ज किया, लेकिन एक शख्स बाहर से आता है लोगों को भडक़ाता है उस पर एफआईआर दर्ज नहीं हुई। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के माध्यम से आज सरकार को चेताया जा रहा है कि जल्द कानूनन की कार्रवाई होनी चाहिए अन्यथा आगामी रणनीति तैयार की जाएगी। एमसी शिमला की रेवेन्यू कोर्ट में मस्जिद की अवैध मंजिलों को लेकर सुनवाई अब 5 अक्तूबर को होनी है। ऐसे में हिन्दू संगठनों ने सीधी चेतावनी दी है कि यदि उस दिन मस्जिद गिराने का फैसला नहीं हुआ तो जेल भरो आंदोलन शुरू होगा।

उपरोक्त तथ्यों को देखते हुए कहा जा सकता है कि अवैध निर्माण और अवैध लोगों का मस्जिदों में रहने के विरोध में हिमाचल वासियों में रोष है। संजौली मस्जिद का मामला न्यायालय में है जबतक न्यायालय अपना फैसला नहीं सुना देता तब तक प्रदर्शनकारियों को धैर्य रखना चाहिए। मामला संवेदनशील है इस बात का ध्यान रखकर हिमाचल सरकार और न्यायालय दोनों को मामले को एक समय सीमा के बीच ही हल करना चाहिए।

जहां तक राजनीतिक दलों का प्रश्न है उन्हें इस मामले का राजनीतिकरण करने की बजाए हल करने में समाज व सरकार की सहायता करना चाहिए। राजनीतिक दलों की हिमाचल वासियों के प्रति यह बड़ी सेवा होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *