” सुख इन्द्रियों का तर्पण है, इसमें आत्मा तो अतृपत रह जाती है” :पंडित सुमित शास्त्री
रघुनाथ शर्मा, जसूर: ढन गांव में चल रही श्रीमद भागवत कथा के तीसरे दिन “विषय सुख इन्द्रियों का तर्पण है, इसमें आत्मा तो अतृपत रह जाती है” उक्त प्रवचन पंडित सुमित शास्त्री ने तहसील ज्वाली के तहत पड़ने वाले गांव ढन में चल रही श्रीमद भागवत कथा के तीसरे दिन श्रोताओं से कहे।
पंडित सुमित शास्त्री ने कहा कि कपिल भगवान ने अपनी माता देवहूति को उपदेश देते हुए कहा कि मां जीव को संसार के जितने भी विषय सुख का भोग कर ले, वास्तविक शान्ति मिलना कठिन है। विषय तो स्वयं अपूर्ण है, उन्हें पाकर हम पूर्ण कैसे हो सकते हैं । जीवन में परिपूर्णता तभी आयेगी जब हम पूर्ण के साथ मिलेंगे। पूर्ण के साथ मिलने के लिए हमें सच्चे संतो का संग करना पड़ेगा । उन संतो के पास जब तुम बैठोगी तो वह तुम्हें मेरी कथा चर्चा सुनाएंगे, आपका मन मेरे गुणों के प्रति आकर्षित हो जायेगा जिससे श्रद्धा उत्पन्न होगी और श्रद्धा से विशुद्ध प्रेम उत्पन्न होगा और वही प्रेम एक दिन भक्ति के रूप में बदल जायेगा और वही भक्ति एक दिन तुम्हें भगवान का साक्षात्कार करवा देगी । कथा मेंअश्वनी कुमार, अजय, राकेश, सतीश,उर्मिला प्रधान,सुनीता देवी,विमला,रक्षा ने भाग लिया । कल यहां भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जायेगा।
