February 19, 2026

गौतम-सागर अदाणी पर लगे आरोपों को समूह ने नकारा

कहा- अमेरिकी कोर्ट में फेडरल करप्शन प्रैक्टिस एक्ट के उल्लंघन का आरोप नहीं

नई दिल्ली : एशिया के दूसरे सबसे अमीर कारोबारी गौतम अडानी और उनकी कंपनी अडानी ग्रीन एनर्जी की ओर से अमेरिकी रिश्वतखोरी मामले में बड़ा बयान सामने आया है। अडानी ग्रीन एनर्जी ने बुधवार को शेयर बाजार की फाइलिंग्स में कहा है कि उन पर लगाए गए रिश्वत के आरोप की खबरें गलत और निराधार हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी फेडरल करप्शन प्रैक्टिस एक्ट के तहत लगाए जाने का समाचार पूरी तरह से गलत है। ग्रुप की ओर से स्पष्ट किया गया है कि गौतम अडानी-सागर अडानी और विनीत जैन पर यूएस डीओजे प्रोसिक्यूशन या यूएस एसईसी की शिकायत में अमेरिकी फेडरल करप्शन प्रैक्टिस एक्ट के उल्लंघन का कोई मामला नहीं है।

अडानी ग्रुप की कंपनी अडानी ग्रीन ने अपनी एक्सचेंज फाइलिंग में जानकारी देते हुए कहा कि गौतम अडानी, सागर अडानी या विनीत जैन पर कोई रिश्वत का आरोप नहीं है। कंपनी ने अपनी फाइलिंग में कहा है कि अमेरिकी न्याय विभाग के प्रोसिक्यूशन में सिर्फ एजुरे और सीडीपीक्यू ऑफिशियल पर रिश्वतखोरी का आरोप लगाया है। कंपनी ने कहा, जो रिश्वत और भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, वो खबरें पूरी तरह से गलत हैं।

वास्तव में न्यूयॉर्क की फेडरल कोर्ट ने सुनवाई के दौरान गौतम अडानी की कंपनी पर अमेरिकी निवेशकों से फ्रॉड करने और सोलर एनर्जी कॉन्ट्रेक्ट हासिल के लिए भारत के अधिकारियों को रिश्वत देने के आरोप लगा हैं। फेडरल कोर्ट की ओर से लगाए आरोपों में कहा गया है कि 2020 से 2024 के बीच सोलर प्रोजेक्ट हासिल करने के लिए गलत रूट से भारतीय अधिकारियों 265 मिलियन डॉलर को रिश्वत दी गई।

इस मामले में देश के पूर्व अटॉर्नी जनरल और सीनियर लॉयर मुकुल रोहतगी भी सामने आ गए हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रोसिक्यूशन में 5 आरोप शामिल हैं, जिनमें से धारा 1 और 5 सबसे ज्यादा अहम हैं। इन ही मामलों में गौतम अडानी और सागर अडानी पर कोई आरोप नहीं लगाए गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि गौतम अडानी और सागर अडानी पर करप्शन प्रैक्टिस एक्ट आरोप नहीं है। धारा-5 के तहत जो हैं, उनमें इन दोनों का नहीं, बल्कि कुछ विदेशी लोगों का नाम शामिल है।

सीनियर लॉयर ने के अनुसार आरोपपत्र में यह स्पष्ट करना होता है कि उस व्यक्ति ने क्या किया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह के आरोप अडानी पर लगाए गए हैं, आरोप पत्र में ऐसा एक भी नाम नहीं है। न ही इस बात की जानकारी दी गई है कि किस तरह से रिश्वत दी है और किन अधिकारियों को रिश्वत दी है। आरोप पत्र में जिन कंपनियों पर आरोप लगाए गए हैं, अडानी ग्रुप की ओर से ये साबित करना है कि वे उन लोगों के साथ जुड़े हैं या नहीं।

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