अंतरिम बजट में मोदी सरकार के आत्मविश्वास की झलक
आम जनता के साथ-साथ देश के राजनीतिक दल भी उम्मीद कर रहे थे कि मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के अंतिम वर्ष में पेश किए जाने वाले अंतरिम बजट में मतदाताओं को लुभाने के भरपूर प्रयास किए जाएंगे। लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जो अंतरिम बजट पेश किया उसमें ऐसा कुछ भी नहीं था जिसे चुनावी राजनीति को प्रभावित करने वाला बजट माना जा सके। वित्त मंत्री द्वारा पेश किया गया अंतरिम बजट उन राजनीतिक दलों के लिए एक सबक है जो ऐसे अवसर पर चुनावी रेवड़ियां बांटने की घोषणाएं कर मतदाताओं को प्रभावित करने की ताक में रहते हैं।
अंतरिम बजट से यह भी स्पष्ट होता है कि मोदी सरकार अपने कार्यकाल के दौरान किए गए कार्यों से संतुष्ट है व मानती है कि मतदाताओं का भरोसा उस पर बना हुआ है। इसका मतलब है कि सरकार यह मानकर चल रही है कि जनता को उस पर यह भरोसा है कि वह देश हित में सही दिशा में काम कर रही है। शायद जनता के इसी भरोसे के चलते अंतरिम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने साफ तौर पर यह कहा कि पूर्ण बजट में बड़ी घोषणाएं की जाएगी।
कोविड महामारी के चलते जहां कई प्रमुख देशों की अर्थव्यवस्थाएं संकट में फंस गई और अभी तक उबर नहीं सकी है वहीं भारतीय अर्थव्यवस्था कोरोना संकट से उबर कर सबसे तेज गति से आगे बढ़ रही है। भारत जैसे विशाल आबादी और अपेक्षाकृत कमजोर स्वास्थ्य ढांचे वाले देश का कोविड संकट से पार पाना एक कठिन चुनौती था लेकिन मोदी सरकार ने इस चुनौती का सामना कहीं अधिक कुशलता से किया।
सरकार ने अंतरिम बजट में ऐसी कोई घोषणा नहीं की जिससे विपक्ष को यह कहने का अवसर मिले कि उसने लोगों को लुभाने के लिए रेवड़ियां बांटने का काम किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने भाषण में केवल अपनी सरकार की उपलब्धियां को विस्तार से रेखांकित ही नहीं किया बल्कि सरकार के भावी एजेंडे की झलक भी पेश की। इसी के साथ उन्होंने विपक्ष की चुनावी रणनीति को भी कटघरे में खड़ा किया।
अंतरिम बजट के बाद देश को प्रतीक्षा है पूर्ण बजट की, क्योंकि उसमें बड़ी घोषणाएं करने की बात कही गई है। देश की जनता को मोदी सरकार से अन्य अनेक अपेक्षाओं के साथ यह उम्मीद भी है कि वह अपने सुधार कार्यक्रम को और अधिक तेजी दे क्योंकि कई अन्य सुधारों की जनता को प्रतीक्षा है। भले ही केंद्र में शीर्ष स्तर पर भ्रष्टाचार का कोई बड़ा मामला देखने को न मिला हो लेकिन नौकरशाही के मध्य और निचले स्तर पर भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लग सकी है। कुल मिलाकर अंतरिम बजट में मोदी सरकार के लोकसभा चुनावों के उपरांत सत्ता में वापसी के विश्वास की झलक नजर आती है। साथ ही यह उन राजनीतिक दलों के लिए संदेश भी है जो मतदाताओं को ऐसे माध्यमों से प्रलोभित करने की ताक में रहते हैं।
