बंदरों के आतंक से मक्की की कच्ची फसल काटने को विवश किसान
अजय शर्मा, बंगाणा,
कुटलैहड़ के क्षेत्र के कई गांवों के किसान बंदरों के आतंक से मक्की की कच्ची फसल को काटने के लिए विवश हो गए हैं। इन किसानों का आरोप है कि प्रतिवर्ष बंदरों की बढ़ती संख्या से वह परेशान हैं। मक्की की फसल अपने पूरे यौवन पर है लेकिन बंदर व जंगली सूअर उनकी फसलों को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं। बंदरों व जंगली जानवरों के आतंक से किसान मक्की की कच्ची फसल को काटने के लिए विवश हो गए हैं।
क्षेत्र के कई गांवों घनेटी, मटियाना, ठठूं, तमलेट,बुढ़वार सहित गांव के कई किसानों ने मक्की की कटाई का कार्य आरंभ कर दिया है। इन किसानों का आरोप है कि पहले अत्यधिक बारिशें व अब बंदरों व जंगली जानवरों ने उनकी मक्की की फसल को नुकसान पहुंचाना आरंभ कर दिया है जिसकी वजह से उन्हें कच्ची फसल ही काटने पड़ रही है।
इन किसानों का आरोप है कि वह प्रदेश सरकार व प्रशासन से कई बार बंदरों व जंगली जानवरों से निजात दिलवाने के लिए आग्रह कर चुके हैं लेकिन क्षेत्र में हर वर्ष बढ़ रही बंदरों की तादाद उन्हें अनाज की फसलों को बीजने से रोक रही है। बंदरों का फसलों पर इसी प्रकार हमला जारी रहा तो आने वाले समय में किसान फसलों को बीजना बंद कर सकते है
इस संबंध में पंचायत प्रधान राजकुमारी ने बताया कि उनकी पंचायत के कई गांव के लोगों ने मक्की की कच्ची फसल को बंदरों के आतंक के कारण काटना आरंभ कर दिया है। इस क्षेत्र में बंदरों की तादाद लगातार बढ़ती ही जा रही है कृषि अधिकारी सतपाल धीमान का कहना है कि प्रदेश सरकार द्वारा मुख्यमंत्री खेत संरक्षण के माध्यम से किसान 70% अनुदान पर अपने खेतों में तारबंदी लगा सकते हैं जिससे सूअर और बंदरों से निजात मिलेगी। यह आवेदन ऑनलाइन के माध्यम से होगा।
