अनुशासनहीनता की वजह से कर्मचारियों को किया गया बर्खास्त: हरपाल सिंह चीमा
चंडीगढ़, पंजाब सरकार में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने आबकारी एवं कराधान विभाग से चार कर्मचारियों के बर्खास्तगी को उनके अनुशासनहीनता का नतीजा बताया। हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि विभाग के कर्मचारी पिछले लंबे समय से काम पर नहीं लौट रहे थे। इस संबंध में कई बार उन्हें इत्तला किया गया। उनसे संवाद स्थापित करने के लिए कहा गया, लेकिन उनकी तरफ से कोई संतोषजनक जवाब नहीं आया। इसी वजह से हमने इन कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया। इस कार्रवाई से हमने अन्य कर्मचारियों के बीच यह संदेश भेजने का प्रयास किया है कि वे अपने कामों को लेकर गंभीर रहें और किसी भी प्रकार की कोताही न बरतें। उन्होंने कहा कि मैंने विभाग के सभी कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दे दिया है कि वे विभाग से संबंधित हर काम को नियमानुसार करें। नियमों के साथ किसी भी प्रकार की अवहेलना न करें। कोशिश करें कि आपकी कार्यशैली से आम जनता को किसी भी प्रकार की दिक्कत न हो। हमारा मूल उद्देश्य ही जनता की सेवा करना है और अगर इस दिशा में किसी भी प्रकार की कोताही बरती जाएगी तो हम इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे। जनता का हित हमारे लिए सर्वोपरि है। वहीं, पंजाब सरकार में मंत्री ने भाजपा पर देश में नफरत फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि जब देश में भाजपा की सरकार का आगमन हुआ है, तब से इस देश में नफरत का माहौल बना हुआ है। लोगों के बीच में लगातार नफरत की खाई चौड़ी होती जा रही है। देश में सहिष्णुता का माहौल रहा है और हमेशा से ही इसे बने रहने देना चाहिए। हमारे देश में एकता और अखंडता का माहौल है, जिसे भारतीय जनता पार्टी के लोग तोड़ नहीं सकते हैं।
उन्होंने भाजपा के बुलेट ट्रेन लाने के वादे पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब कभी किसी राज्य में चुनावी बिगुल बजता है, तो ये लोग इसी तरह के लोकलुभावने वादे करते हैं, लेकिन बाद में इन वादों को भूल जाते हैं। अब इन लोगों ने एक बार फिर से बुलेट ट्रेन लाने का वादा किया है। हम आशा करते हैं कि ये लोग इस बार जरूर बुलेट ट्रेन लेकर आएंगे।
उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर भी दुख जाहिर किया और केंद्र सरकार से इसे लेकर कठोर कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है, जो निंदनीय है। हम केंद्र सरकार से मांग करते हैं कि इस संबंध में यथाशीघ्र कठोर कदम उठाए।
