बाघ के चुंगल से बची अदिति ठाकुर को जिला पार्षद सुशील कालिया ने किया सम्मानित
संजीव डोगरा, दौलतपुर चौक,
गगरेट विधानसभा क्षेत्र के अमलेहड़ गांव में बाघ के चुंगल से सुरक्षित बची 15 वर्षीय अदिति ठाकुर को जिला पार्षद सुशील कालिया ने सोमवार को घर जाकर सम्मानित किया, साथ सरकार से मांग की कि अदिति को उसकी बहादुरी के लिए सम्मानित किया जाए। गौर रहे कि सेंट डी आर पब्लिक स्कूल गगरेट में दस जमा एक मे पढ़ने वाली अदिति ने बताया कि वह रविवार को नोट्स लेने अपनी सहेली के घर गयी लेकिन सड़क पर पहुंचते ही उसने एक बाघ देखा, जिसे देख वो जोर से चीखी चिल्लाई लेकिन बाघ उसकी तरफ बढ़ने लगा और वो वहीं बेहोश हो गयी। अदिति ने बताया कि जब उसे होश आया तो उसने अपने आपको लगभग 700-800 मीटर नीचे गहरी खाई में एक पत्थर पर पाया। बताया जा रहा है कि जिस वक्त अदिति को बाघ ने उठाया उसी वक्त एक बुलेट एवम ट्रेक्टर इत्यादि वाहन वहां से गुजरे, जिनकी चढ़ाई पर तेज आवाज सुन कर शायद बाघ वहां से भाग गया, लेकिन होश आते ही अदिति ठाकुर झाड़ियों से रेंगते हुए डेढ़-दो घण्टे के सफर के बाद अपने परिजनों तक पहुंच पाई। अदिति ने बताया कि खाई से बाहर निकलने का उसे रास्ता नहीं मिल रहा रहा,लेकिन बाघ के पांवों के निशान देखते हुए वो ऊपर की तरफ आई, लेकिन सघन झाड़ियां उसका रास्ता रोक रही थीं। उसकी जेब मे फोन भी था, लेकिन सिग्नल न होने की वजह से वो परिजनों से सम्पर्क न कर पाई। फिर भी उसने हिम्मत न हारी और सड़क तक बड़ी मुश्किल से पहुंची। तभी मोबाइल का सिग्नल आते ही उसने अपने भाई से सम्पर्क साधा और उसकी जान में जान आयी। उधर अदिति की माता पूजा जसवाल, पिता सुशील कुमार एवम साधु सिंह ने अदिति का बाघ से बचने की घटना को बहादुरी एवम चमत्कार की संज्ञा दी है और बेटी की जान बचाने पर भगवान का शुक्रिया अदा किया है।
सुशील कालिया ने अदिति ठाकुर को बहादुरी पुरस्कार देने की मांग की
बाघ से चुंगल से बचकर डेढ़-दो घण्टे के संघर्ष के पश्चात सड़क पर सुरक्षित पहुंचने वाली अदिति ठाकुर को जिला पार्षद सुशील कालिया ने जहां घर जाकर सम्मानित किया वहीं सरकार से मांग कर डाली कि अदिति बहादुरी को देखते हुए उसे प्रदेश सरकार सम्मानित करे, साथ ही उसके नाम की संस्तुति गणतंत्र दिवस पर सम्मानित होने वाले बहादुर बच्चों की सूची के लिए करे। सुशील कालिया ने बताया कि सोशल मीडिया पर अमलेहड़ में बाघ की मौजूदगी की बात वायरल होने और लगातार बाघ द्वारा मवेशियों को उठा लेने का मामला प्रकाश में होने पर जिस तरह की लापरवाही वन विभाग द्वारा दिखाई गई है,वह निंदनीय है क्योंकि जिस तरह से बाघ ने अदिति को उठाया, उस तरह से उसकी जान को भी खतरा हो सकता था। उन्होंने बाघ को अबिलम्ब पिंजरे में कैद कर कहीं और छोड़ने की मांग की है ताकि दहशत के साये में जी रही अमलेहड़ कि जनता चैन की सांस ले सके।
