नगर निगम के महापौर और उप महापौर के चुनाव में विधायकों को मतदान का अधिकार देने का क्या औचित्य: धूमल
मोहित कांडा, हमीरपुर,रजनीश, हमीरपुर, निर्णय के अनुसार नगर निगमों के महापौर और उप महापौर के चुनाव मे स्थानीय विधायकों को भाग लेने और मतदान करने का अधिकार दिया गया है। इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री व वरिष्ठ भाजपा नेता प्रेम कुमार धूमल ने कहा है कि कई बार क्षणिक लाभ के लिए हम ऐसे निर्णय ले लेते हैं जिनके परिणाम दूरगामी होते हैं और इसके कारण या तो बाद में निर्णय बदलना पड़ता है या ऐसे निर्णय का दुष्प्रभाव का तमाम व्यवस्था पर असर पड़ता है। हाल ही में हिमाचल प्रदेश सरकार ने एक ऐसा निर्णय लिया है जिसमे लगता है कि शायद उसके दूरगामी प्रभावों पर विचार नही किया गया है। इस निर्णय के अनुसार नगर निगमों के महापौर और उप महापौर के चुनाव मे स्थानीय विधायकों को भाग लेने और मतदान करने का अधिकार दिया गया है। शायद ये निर्णय कानून की कसौटी पर सही नही उतरेगा। उन्होंने कहा कि इस निर्णय के परिणाम स्वरूप यदि महापौर और उपमहापौर के चुनाव में विधायकों को मतदान का अधिकार होगा। तो फिर क्या जब नगर परिषदों, नगर पंचायतों, जिला परिषदों, पंचायत समितियों के अध्यक्ष और उपअध्यक्ष का चुनाव होगा तो उसमें भी विधायकों को मतदान का अधिकार होगा? क्या विधानसभा का चुनाव जीतकर विधायक को विधानसभा के अतिरिक्त स्थानीय निकायों ओर पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में मतदान का अधिकार मिल जाएगा ? इसी के आधार पर सांसदों को यह अधिकार होगा कि उनके चुनाव क्षेत्र में आने वाले सभी नगर निगमों , नगर परिषदों ,नगर पंचायतों, जिला परिषदों , पंचायत समितियों के अध्यक्ष और उपअध्यक्ष के चुनाव में सांसद भी अपने मत का प्रयोग कर सकेंगे। फिर मामला केवल पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों के मुखिया चुनने तक ही सीमित नही होगा फिर सांसद को अपने राज्य में मुख्यमन्त्री के चुनाव में मतदान करने का अधिकार मांगने से कैसे रोका जा सकेगा और यह प्रश्न केवल एक राज्य तक सीमित नही होगा , राष्ट्रीय स्तर पर इसका प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि क्षणिक लाभ के लिए दूरगामी परिणामों वाले निर्णय लेंने में पूरा विचार विमर्श होना चाहिये। एक दो नगर निगमों के महापौर ओर उपमहापौर के चुनाव के लालच के साथ साथ प्रदेश व्यापी ओर राष्ट्रव्यापी परिणामों को भी ध्यान में रखना चाहिए। ऐसे निर्णय तर्कसंगत नहीं होते , संविधान निर्माताओं ने इन्ही बातों को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री का चुनाव करने का अधिकार केंद्र में केवल लोकसभा के सांसदों के दिया है , राज्य सभा के सांसदों को यह अधिकार नही है। इसी प्रकार प्रदेश सरकार का मुखिया मुख्यमंत्री विधानसभा के विधायक चुनते हैं, विधान परिषद सदस्यों को यह अधिकार नही है। इसलिए नए आदेशानुसार चुने गए महापौर और उपमहापौर का चयन क्या कानून की कसौटी पर न्यायालय में टिक पायेगा ? यह महत्वपूर्ण प्रश्न रहेगा।
