गोवर्धन प्रसंग सुनकर श्रद्धालु हुए भाव विभोर
संजीव डोगरा, दौलतपुर चौंक, 3 नवम्बर
गगरेट विधानसभा क्षेत्र के दौलतपुर चौक के माता कुहा देवी मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिवस शुक्रवार को कथावाचक भक्ति प्रसाद गिरी जी महाराज दगड़ी वाले (हमीरपुर) के द्वारा भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं एवं कंस द्वारा भेजे गए राक्षसों के वध का वर्णन भी सुनाया। इस अवसर पर उन्होंने गोवर्धन पूजा प्रसंग सुनाया। कथा में गोवर्धन पूजा की दिव्य कथा विस्तार पूर्वक सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। कथा वाचक ने भक्तों को कथा का रसपान करवाते हुए कहा कि जहां सत्य एवं भक्ति का समन्वय होता है, वहां भगवान का आगमन अवश्य होता है। उन्होंने गाय की सेवा एवं महत्व को समझाते हुए बताया कि प्रत्येक हिन्दू परिवार में गाय की सेवा अवश्य होनी चाहिए क्योंकि गाय माता में 33 करोड़ देवी देवताओं का वास होता है। उन्होंने कहा कि जब भगवान श्रीकृष्ण नंद गांव पहुंचे तो देखा कि गांव में इंद्र पूजन की तैयारी में 56 भोग बनाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने नंदबाबा से पूछा कि कैसा उत्सव होने जा रहा है जिसकी भव्य तैयारी हो रही है। नंद बाबा ने कहा कि यह उत्सव इंद्र भगवान के पूजन के लिए हो रहा है क्योंकि वर्षा के राजा इंद्र हैं और उन्हीं की कृपा से बारिश होती है। इसलिए उन्हें खुश करने के लिए इस पूजन का आयोजन हो रहा है। कथा वाचक ने बताया कि इस पर भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के लिए हो रहे यज्ञ को बंद करा दिया और कहा कि जो व्यक्ति जैसा कर्म करता है, उसे वैसा ही फल मिलता है। उन्होंने कहा कि इससे इंद्र देव क्रोधित हो गए और भारी बारिश करना शुरू कर दिया। नंद गांव में इससे त्राहि त्राहि मचने लगी तो भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को लगातार सात दिन तक उठाए रखा और इंद्र के अभियान को चकनाचूर किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत में गोवर्धन पूजा का प्रसंग यह सिद्ध करता है कि हिन्दू धर्म एवं शास्त्र कितने वैज्ञानिक है जिनमें प्रकृति के महत्व को भगवान की तरह पूजनीय बताया गया है। जो पहाड़, नदियां, झील, सरोवर, कूप हमारी जरूरतें पूरी करते हैं। उन्होंने कहा कि प्राणी जगत को उनका आभार मानकर ईश्वर के समान पूजना चाहिए।
