January 27, 2026

बधिर छात्र अब सांकेतिक भाषा में अंतरिक्ष और तारों के बारे में सीख रहे हैं:राज्यपाल

चण्डीगढ़ 2 नवम्बरः- हमारे देश के ओजस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने देखा और महसूस किया कि बधिर और मूक लोगों को औपचारिक शिक्षा प्राप्त करने की सुविधा दी जानी चाहिए। उन्होंने देश कि नई शिक्षा नीति में एक हिस्से के रूप में स्कूलों में भारतीय सांकेतिक भाषा को एक विषय के रूप में शामिल करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने यह विचार वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद् भारत, चंडीगढ़ में आयोजित तीन दिवसीय यूसुफ हामिद रसायन विज्ञान शिविर में संबोधित करते हुए प्रगट किए। उन्होंने कहा कि CSIR आईएमटेक, रॉयल सोसाइटी फॉर केमिस्ट्री और हरियाणा वेलफेयर सोसाइटी फॉर पर्सन्स विद हियरिंग एंड स्पीच इंपेयरमेंट ने इस अनूठे अभ्यास के लिए एक रोड मैप बनाने के लिए हाथ मिलाया है।
दत्तात्रेय ने कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार हम सब जानते हैं कि देश में लगभग पचास लाख लोग बधिर हैं। जब कि WHO के नवीनतम अनुमान के अनुसार भारत में यह संख्या छः करोड़ तीन लाख हो सकती है और इनमें से अधिकांश स्कूल जाने की उम्र के बच्चे हैं। जाहिर है, हमारे लोगों और बच्चों को सिर्फ अपनी भाषा की जरूरत नहीं है, उनकी शैक्षिक और सांस्कृतिक आवश्यकताएँ भी हैं। मुझे पूरी उम्मीद है कि यह कार्यशाला इस छोटे लेकिन महत्वपूर्ण समुदाय की शैक्षिक और वैज्ञानिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक ऐतिहासिक अभियान की शुरुआत है।
उन्होंने कहा कि यह बेहद खुशी की बात है कि करनाल में डॉ. अलका राव की टीम द्वारा शुरू की गई एस्ट्रोनॉमी लैब बहुत अच्छा काम कर रही है। बधिर छात्र अब सांकेतिक भाषा में अंतरिक्ष और तारों के बारे में सीख रहे हैं। शिक्षक भी बधिर बच्चों की शिक्षण प्रक्रिया के लिए एस्ट्रोलैब को उपयोगी पा रहे हैं। जब इस परियोजना के बारे में पता चला, तो मेरा पहला विचार यह था कि किसी ने कम से कम बधिरों और एसटीईएम विषयों विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित के बारे में सोचना तो शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि जब पूरी दुनिया प्रौद्योगिकी के इर्द-गिर्द काम कर रही है, तो छः करोड़ तीन लाख जैसे बड़े समुदाय को प्रौद्योगिकी क्षेत्र से बाहर कैसे रखा जा सकता है। इसके लिए प्रौद्योगिकी शिक्षण को समावेशी बनाने के बारे में सोचने के लिए सीएसआईआर को बधाई देता हूं।
राज्यपाल श्री दत्तात्रेय ने कहा कि रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री के सहयोग से CSIR & IMTECH  में आयोजित यह कार्यक्रम एक बहुत ही नवीन और समय-उपयुक्त कार्यक्रम है। यह कक्षा 9वीं से 12वीं के बधिर छात्रों को एक अनूठा अवसर प्रदान करेगा, जिन्हें वैज्ञानिक शिक्षा के मामले में अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। यह तीन दिवसीय रसायन विज्ञान शिविर बधिर बच्चों की जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार किया गया है। इस अमृत काल में, इसके महत्व को कम नहीं किया जा सकता है, क्योंकि इस क्षण में समावेशिता के लिए हमारे दृष्टिकोण को हमेशा के लिए आकार देने की क्षमता है, जिन्होंने इस पहले भारतीय सांकेतिक भाषा सुलभ रसायन विज्ञान शिविर की संकल्पना की। रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री और CSIR & IMTECH  दोनों ही प्रशंसा के पात्र हैं। आज के शिविर में मैं आपकों बताना चाहूंगा कि आपकी अपनी हरियाणा सरकार ने भी कई कल्याणकारी योजनाएं लागू की हैं। मूक-बधिर को सरकारी नौकरियां में एक प्रतिशत आरक्षण वर्ष 2017 से है। हरियाणा सरकार ने वर्ष 2021 को अधिसूचना जारी करके सभी विभागों को मूक-बधिर सहित सभी श्रेणियों के दिव्यांगज़न के जनवरी 1996 से बैकलॉग पदों की गणना करके विशेष भर्ती अभियान चलाने का निर्णय लेकर अमल प्रारम्भ कर दिया है। लगभग पचीस सौ पद मूक-बधिर श्रेणी के दिव्यांगज़न के निकलते है। इस बार HCS में भी एक मूक-बधिर उम्मीदवार को चुना गया है।
उन्होंने कहा कि इसी प्रकार रेड क्रॉस एवं भारत सरकार की कम्पनी एलिमको के माध्यम से 2023 में विभिन्न स्थानों पर लगे कैंपेन में लगभग दो हजार बधिर दिव्यांगज़न को निशुल्क श्रवण यंत्र प्रदान किए गए। वर्ष 2023 में पांच मूक-बधिर बच्चों को लगभग बीस लाख रुपयों की लागत से लगने वाले Coclear Implantation निशुल्क प्रदान किया गया। इस वर्ष लगभग पांच हजार नए मूक-बधिर दिव्यांगज़नों की ऑनलाइन दो हजार सात सौ पचास रुपये प्रति माह की अनुदान राशि प्रारम्भ की गई है।
उन्होंने कहा कि यूसुफ हामिद रसायन शिविर जैसी और अधिक पहलों का समर्थन और पोषण करने की प्रतिज्ञा करें। ऐसा करके, हम एक अधिक समावेशी समाज के निर्माण में योगदान देंगे, जो हर किसी को, उनकी पृष्ठभूमि या क्षमताओं की परवाह किए बिना, ज्ञान और वैज्ञानिक अन्वेषण की खोज में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए सशक्त बनाता है।

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