पाक में होने वाली ‘महा बैठक’ पर भी मंडरा रहा खतरा! ईरान-यूएस के बीच फंसा पेच
नई दिल्ली, अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव पर भले ही दो हफ्तों का अस्थाई विराम लगा हो, लेकिन जमीनी हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। संघर्ष-विराम के बाद क्षेत्र में शांति की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन मौजूदा परिस्थितियां इसके उलट नजर आ रही हैं।
ईरान होर्मुज पर अपना नियंत्रण मजबूत बनाए रखने की कोशिश में है, वहीं इजरायल की ओर से लेबनान में सैन्य कार्रवाई जारी है। इन हालातों के बीच दोनों देशों के अधिकारी इस्लामाबाद पहुंचने लगे हैं, जहां संभावित वार्ता की तैयारी चल रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस अस्थाई सीजफायर के बावजूद ईरान कूटनीतिक रूप से मजबूत स्थिति में उभरता दिख रहा है। शुरुआत में जहां अमेरिका के भारी पड़ने की संभावना जताई जा रही थी, वहीं अब चीन और पाकिस्तान की बढ़ती सक्रियता ने समीकरण बदल दिए हैं।
सीजफायर को लेकर दोनों देशों के बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खाते। अमेरिका का कहना है कि यह सिर्फ दो हफ्तों का युद्धविराम है, जिसका उद्देश्य होर्मुज मार्ग को खुलवाना है। वहीं ईरान का दावा है कि अमेरिका उसकी शर्तों—प्रतिबंध हटाने, क्षेत्र से हटने और हर्जाना देने—पर सहमत हुआ है। इन विरोधाभासी बयानों ने स्थिति को और उलझा दिया है।
पाकिस्तान में संभावित शांति वार्ता से पहले ही विवाद खड़ा हो गया है। ईरान के राजदूत द्वारा सोशल मीडिया पर किया गया एक पोस्ट हटाने के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि बातचीत की दिशा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या दोनों पक्ष वास्तव में किसी ठोस समझौते के करीब हैं।
इजरायल ने सीजफायर का समर्थन तो किया है, लेकिन स्पष्ट किया कि यह लेबनान पर लागू नहीं होता। इसके बाद लेबनान में हमले जारी रहे, जिनमें कई लोगों की जान गई। इससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।
अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी मतभेद बरकरार हैं। अमेरिका जहां परमाणु संवर्धन खत्म करने की बात कर रहा है, वहीं ईरान ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है।
