February 14, 2026

अपनी ही पार्टी को मुसीबत में डाल रहे हैं कांग्रेसी नेता

लोकसभा चुनावों के तीन चरण संपन्न हो जाने के उपरांत भी यह नहीं माना जा सकता है कि किसी एक राजनीतिक पार्टी के पक्ष में लहर चल रही है या फिर किसी राजनीतिक पार्टी के प्रति मतदाताओं में नाराजगी नजर आ रही है। इन चुनावों में 400 सीटें जीतने का दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी मुद्दों की तलाश में दिख रही है जबकि अन्य विपक्षी दल भी भाजपा को घेरने के लिए मुद्दा विहीन बयान बाजी करने में जुटे हुए हैं।

आम आदमी पार्टी व इंडी गठबंधन अरविंद केजरीवाल को 21 दिन की अंतरिम जमानत मिलने से उत्साहित है व उम्मीद कर रहे हैं कि उनके चुनाव प्रचार में शामिल होने से विपक्ष को फायदा मिलेगा। आम आदमी पार्टी या इंडी गठबंधन को केजरीवाल की अंतरिम जमानत से लोकसभा चुनावों में लाभ होगा या नहीं, यह कहा नहीं जा सकता लेकिन उन्हें जमानत दिए जाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पक्ष व विपक्ष में बड़ी चर्चा शुरू हो गई है।

अपने नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी गत लोकसभा चुनावों की तरह इस बार भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमलावर है लेकिन कांग्रेस के आक्रमण में पिछले लोकसभा चुनावों की तरह ही इस बार भी वह धार नहीं है जो होनी चाहिए। क्योंकि जिन मुद्दों को राहुल गांधी या कांग्रेस के अन्य नेता उठा रहे हैं वे इतने गंभीर नहीं है जो मतदाताओं के मन पर छाप छोड़ सकें। इसके विपरीत कांग्रेस के कई नेता ऐसे बयान दे रहे हैं जो पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर देते हैं व पार्टी को उन पर सफाई देनी पड़ रही है।

हाल ही में महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा कि विपक्षी गठबंधन सत्ता में आया तो राम मंदिर का शुद्धिकरण किया जाएगा। उनके इस बयान पर भाजपा कांग्रेस पर हमलावर ही थी कि मणिशंकर अय्यर एक वीडियो में अपना पाकिस्तान प्रेम व्यक्त करते और यह कहते दिखे कि उसे सम्मान दिया जाना चाहिए और उससे बात की जानी चाहिए क्योंकि उसके पास परमाणु बम है। उन्होंने यह भी शिकायत की कि गत 10 वर्षों में पाकिस्तान को कोई इज्जत नहीं दी गई। वे पहले भी कांग्रेस के लिए मुश्किलें पैदा कर चुके हैं।

नाना पटोले और मणि शंकर अय्यर से पहले इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा ने कांग्रेस के लिए मुसीबत खड़ी की थी। उन्होंने भारत की आबादी की विविधता को विदेशी नस्ल से जोड़कर यह बताया कि देश के विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले लोग कैसे अलग-अलग देशों जैसे दिखते हैं। जब कांग्रेस सैम पित्रोदा का बचाव करने की स्थिति में नहीं रही तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया, जिस पार्टी ने तत्काल स्वीकार कर लिया। लेकिन यह कहना कठिन है कि इतने मात्र से कांग्रेस राजनीतिक नुकसान से बच जाएगी। इससे पहले इन चुनावों के दौरान ही वह भारत में अमेरिका की तरह विरासत टैक्स लगाने की वकालत कर कांग्रेस के लिए कठिनाई खड़ी कर चुके हैं।

जब चुनाव बिना किन्हीं विशेष मुद्दों के लड़ा जाता है तो ऐसे बयानों को विपक्षी दल हाथों हाथ लपकते हैं, जो इन चुनावों में हो रहा है। कांग्रेस नेताओं के बयान भाजपा व एनडीए के लिए नए मुद्दे दे रहे हैं जो कांग्रेस के लिए हितकर नहीं है। हालांकि यह कहना भी उचित होगा कि इस बार के लोकसभा चुनाव एक फ्रेंडली मैच की तरह लड़े जा रहे हैं जिसमें खिलाड़ियों में करो या मरो की भावना नजर नहीं आ रही है। लेकिन कांग्रेस के कुछ नेता वाहवाही लूटने के फिराक में अपने ही पाले में गोल पर गोल किए जा रहे हैं।

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