महाराष्ट्र में कांग्रेस साफ, झारखंड में हाफ
नई दिल्ली: महाराष्ट्र की राजनीति में कभी केवल और केवल कांग्रेस का ही सिक्का बुलंद हुआ करता था। चाहे वो राज्य के पहले मुख्यमंत्री यशवंतराव चव्हाण हो या अपनी पार्टी बनाने से पहले तक शरद पवार सीएम के चेहरे बदलते रहे लेकिन कांग्रेस का ही परचम लहराता रहा। लेकिन कांग्रेस के इस अभेद्य किले में बीजेपी-सेना गठबंधन ने 1995 में सेंध लगाई कि फिर उससे कांग्रेस कुछ सालों बाद तो उभर आई। लेकिन पहले जैसी वो बात नहीं रही। कांग्रेस के लिए शनिवार का दिन ऊहापोह वाली स्थिति लेकर आया। लोकसभा चुनावों में अपने सीटों के आंकड़े को 99 तक पहुंचाने वाली देश की ग्रैंड ओल्ड पार्टी एक महीने पहले हरियाणा में हार के बाद अब महाराष्ट्र और झारखंड के रुझान बताते हैं कि एक बार फिर उसके लिए राह मुफीद नहीं रही है। महाराष्ट्र में जहां भाजपा गठबंधन 228 सीटों पर आगे चल रहा है वहीं इंडी गठबंधन 53 सीटों पर आगे है उसमें भी कांग्रेस मात्र 18 सीटों पर ही आगे है। अभी तक के रुझानों से पता चलता है कि कांग्रेस को महाराष्ट्र में करारी हार का सामना करना पड़ा है। वह शाम 4 बजे तक 18 सीटों पर आगे थी। वहीं एक औऱ राज्य़ झारखंड में कमजोर कड़ी के रूप में उभर रही है। एकमात्र राहत की बात यह है कि झारखंड में अपने सहयोगी झामुमो के हैविवेट प्रदर्शन के साथ, इंडिया ब्लॉक बहुमत के आंकड़े को पार कर गया है। इसमें भी कांग्रेस मात्र 16 सीटों पर आगे है। अगर रुझान सही रहे तो महाराष्ट्र में कांग्रेस के लिए बुरी ही नहीं बल्कि भयानक खबर है। विशेष रूप से महाराष्ट्र में जहां कांग्रेस ने अपने दम पर और महा विकास अघाड़ी (एमवीए) ने मिलकर लोकसभा चुनावों में भाजपा और महायुति को मात दी थी। महाराष्ट्र में हालात यह है की महा विकास अघाड़ी अकेली शिवसेना शिंदे के बराबर भी सीटें लाने में सफल नहीं हुई है। झारखंड में इंडी गठबंधन 57 सीटों पर आगे है और अगर यह ट्रेंड रहता हैं तो वहां इस गठबन्धन की बहुमत की सरकार आसानी से बन रही है
